नोएडा , अक्टूबर 03 -- उत्तर प्रदेश में नोएडा विधानसभा क्षेत्र-61 की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर समाजवादी पार्टी की नोएडा महानगर संगठन ने मतदाता सूची में डुप्लीकेट एवं संदिग्ध प्रविष्टियों और पात्र मतदाताओं के नाम काटे जाने के मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और गौतमबुद्धनगर जिला निर्वाचन अधिकारी से शिकायतों पर तत्काल जवाब देने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।
सपा नोएडा महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि संगठन ने इससे पहले 3 जून 2026 को प्रेस वार्ता कर नोएडा विधानसभा-61 की मतदाता सूची में करीब 25 हजार डुप्लीकेट एवं संदिग्ध मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज और तथ्य सार्वजनिक किए थे। इस संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त और जिला निर्वाचन अधिकारी को शिकायत भी सौंपी गई थी। संगठन का आरोप है कि करीब चार महीने बीतने के बावजूद शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई सामने नहीं आई है।
उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची के दोबारा परीक्षण में 10 से 15 हजार और ऐसी प्रविष्टियां सामने आई हैं, जिनकी जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम से अलग-अलग ईपीआईसी नंबरों के साथ एक से अधिक प्रविष्टियां दर्ज होने की जानकारी मिली है। इसके उदाहरण के तौर पर हेमंत कीड़ों और प्रदीप कुमार शर्मा कौशल के नामों का उल्लेख किया गया। पार्टी ने इन मामलों का दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन कराने की मांग की।
विधानसभा अध्यक्ष बबलू चौहान और महानगर उपाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी गौरव कुमार यादव ने आरोप लगाया कि संगठन की ओर से निर्वाचन अधिकारियों को बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) की सूची उपलब्ध कराने के बावजूद कई बीएलए और स्थानीय मतदाताओं के नाम सूची से गायब मिले हैं। उन्होंने सेक्टर-63 निवासी कुलभूषण शर्मा, सोरखा निवासी सुभाष वर्मा, सर्फाबाद निवासी सतपाल यादव और मोहम्मद इमरान सहित अन्य लोगों के नामों का उल्लेख करते हुए प्रत्येक मामले की व्यक्तिगत जांच कराने की मांग की।
सपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी वास्तविक मतदाता का नाम हटवाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना निर्धारित प्रक्रिया के नहीं काटा जाना चाहिए। शिकायतों में शामिल नामों और ईपीआईसी नंबरों की बूथ स्तर से लेकर निर्वाचन अधिकारी स्तर तक जांच कर उसके परिणाम सार्वजनिक किए जाएं।
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