नोएडा , अक्टूबर 10 -- विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश में नोएडा सेक्टर-110 स्थित महर्षि विश्विद्यालय में आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते कामकाज के दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियों और समय की कमी के बीच मानसिक स्वास्थ्य सेमिनार का आयोजन किया गया।

शनिवार को आयोजित सेमिनार की जानकारी साझा करते हुए आयोजकों ने संवादाताओं को बताया कि,विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 'तनाव से शांति की ओर मानसिक स्वास्थ्य की यात्रा' विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें मनोवैज्ञानिकों, चिकित्सकों, ध्यान शिक्षकों और कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने तनाव के कारणों, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों और उनसे निपटने के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की।

सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि तनाव का असर न केवल व्यक्ति की मानसिक स्थिति, बल्कि उसके शारीरिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर भी पड़ता है। ऐसे में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और तनावमुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया और महर्षि विश्विद्यालय में 'तनाव से ठहराव की ओर' पहल शुरू की है। इसके तहत कॉर्पोरेट क्षेत्र के कर्मचारियों सहित आम लोगों को भावातीत ध्यान, मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन के महत्व से परिचित कराया जाएगा।

कनेक्टेड माइंड्स की वेल-बीइंग विशेषज्ञ ऋतु भारद्वाज ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक संकोच को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय उन पर खुलकर बात करनी चाहिए। इससे लोग अपनी समस्याएं साझा कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर समय रहते सहायता ले सकेंगे।

टाइम्स ग्रुप के हर्षवर्धन शर्मा ने कार्यस्थल पर बढ़ते तनाव और उसके प्रभावों पर विचार रखे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भावातीत ध्यान से उन्हें जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिली। उन्होंने व्यस्त दिनचर्या के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता भी बताई।

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के सहायक प्रोफेसर डॉ. भारत कृष्ण खुंटिया ने आयुर्वेद के दृष्टिकोण से स्वास्थ्य पर प्रकाश डालते हुए अच्छी नींद, संतुलित दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य के महत्व को समझाया। वहीं, भावातीत ध्यान की इंडिया हेड एवं ध्यान शिक्षिका अदिति श्रीवास्तव ने तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक तरीके के रूप में भावातीत ध्यान की जानकारी दी और इस विषय पर हुए शोध का उल्लेख किया।

कार्यक्रम में वान्या आर्या और डॉ. प्रद्युम्न पांडे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया। उन्होंने बताया कि महर्षि महेश योगी ने 1970 के दशक से भावातीत ध्यान के माध्यम से लोगों को तनावमुक्त जीवन की दिशा में प्रेरित किया।

सेमिनार में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और भावनात्मक संतुलन से जुड़े सवाल पूछे। श्री निश्चल महाजन ने 'स्व' से जुड़ी विशेष गतिविधि का संचालन किया, जिससे प्रतिभागियों को आत्मचिंतन का अवसर मिला। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर की डीन एकेडेमिक्स तृप्ति अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के डीन, डिप्टी डीन, फैकल्टी सदस्य और कर्मचारी मौजूद रहे।

आयोजकों ने बताया कि यह पहल केवल कॉर्पोरेट जगत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कामकाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण तनाव का सामना कर रहे लोगों तक भी पहुंचेगी। विशेषज्ञों ने संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से समय निकालना, स्वस्थ आदतें अपनाना और जरूरत पड़ने पर योग्य मनोवैज्ञानिक या चिकित्सक की सहायता लेना जरूरी है।

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