तिरुवनंतपुरम , सितंबर 18 -- केरल, 'नॉलेज वैली और रिसर्च पार्क' प्रोजेक्ट' शुरू करने जा रहा है जिसका मकसद राज्य को वैश्विक स्तर पर 'नालेज हब' बनाना है और इसके लिए राज्य अपनी मौजूदा उच्च शिक्षा एवं शोध क्षमताओं का इस्तेमाल करेगा तथा उद्योग जगत, निजी क्षेत्र और वैश्विक स्तर की विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करेगा।

इस प्रस्तावित पहल पर तीन दिन तक चले 'रीइमैजिनिंग केरलम' कार्यक्रम के आखिरी दिन एक अहम सत्र में चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में सरकार की खास परियोजनाओं को लागू करने की रणनीतियां बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को एक साथ लाया गया था।

उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन और उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव बी. अशोक ने इस चर्चा का नेतृत्व किया।

श्री जॉन ने कहा, "केरल में उच्च शिक्षा और शोध का मज़बूत आधार है। नॉलेज वैली और रिसर्च पार्क को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर देखा जा रहा है जो इस मौजूदा क्षमता को उद्योग, नवाचार और वैश्विक मौकों से जोड़ेगा।"उन्होंने कहा कि मकसद कोई अलग-थलग संस्थान बनाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा बेहतरीन ज्ञान का पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो आर्थिक मूल्य और युवा प्रतिभाओं के लिए मौके पैदा कर सके और साथ ही केरल को ग्लोबल नॉलेज हब के तौर पर मजबूत कर सके।

श्री अशोक ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का फोकस राज्य की बड़ी नॉलेज और रिसर्च क्षमताओं को प्रैक्टिकल इस्तेमाल और आर्थिक मौकों में बदलने पर होना चाहिए।

इस पहल का एक अहम हिस्सा 'रिसर्च पार्क' है, जिसे रिसर्च, सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस, साझा एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, प्रोटोटाइपिंग और डीप-टेक डेवलपमेंट के लिए इंडस्ट्री से जुड़े प्लेटफॉर्म के तौर पर देखा जा रहा है। भाग लेने वालों ने शिक्षा, रिसर्च और इंडस्ट्री के बीच मजबूत संबंध बनाने और पारंपरिक शैक्षणिक ढांचे से आगे बढ़कर असल दुनिया की समस्याओं को हल करने वाली शोध की ओर बढ़ने पर ज़ोर दिया।

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