सीतापुर , फरवरी 18 -- सीतापुर जिले स्थित 88 हजार ऋषियों की तपोस्थली नैमिषारण्य से बुधवार सुबह पहली किरण के साथ 84 कोसी परिक्रमा शुरू हो गई। साधु-संतों और श्रद्धालुओं का विशाल जत्था "राम दल" के रूप में भगवान राम का गुणगान करते हुए परिक्रमा मार्ग पर अग्रसर हुआ। विभिन्न स्थानों पर परिक्रमार्थियों का स्वागत किया गया तथा सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा।
84 कोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष एवं पहल आश्रम के महंत नारायण दास ने बताया कि यह परिक्रमा पूर्ण फलदायी और मोक्षदायिनी मानी जाती है। मान्यता है कि सतयुग में महर्षि दधीचि ने अस्थि दान से पूर्व देवताओं के आग्रह पर यहां परिक्रमा की थी। त्रेता युग में लंका विजय के बाद भगवान राम ने भी अयोध्यावासियों के साथ इस परिक्रमा को किया था, तभी से इसे "राम दल" के रूप में आगे बढ़ाया जाता है।
मंगलवार रात से ही चक्रतीर्थ और गोमती घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। स्नान और दान के बाद बुधवार सुबह साधु-संतों के नेतृत्व में परिक्रमा दल रवाना हुआ। अपर जिलाधिकारी मिश्रिख अभिनव यादव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल वैन, खाद्य विभाग की टीम, पेयजल टैंकर और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक तैयारियां की गई हैं।
परिक्रमा का पहला पड़ाव जारिगामा कोरोना में होगा। इसके बाद हरैया (हरदोई), नगवा कोठवा, गिरधरपुर उमरी, सकीं गोपालपुर (हरदोई) आदि स्थानों पर विश्राम करते हुए 23 फरवरी को दल पुनः सीतापुर सीमा में प्रवेश करेगा। 28 फरवरी को मिश्रिख पहुंचकर पंचकोशी परिक्रमा संपन्न की जाएगी। इस धार्मिक यात्रा में नेपाल सहित देश के विभिन्न राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना आदि से श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
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