नैनीताल , सितम्बर 15 -- उत्तराखंड के नैनीताल से सटे ज्योलिकोट क्षेत्र में फैली जलजनित महामारी के मामले में उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव से पूरे प्रकरण में कार्रवाई को लेकर शपथपत्र पेश करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अधिवक्ता रवि बिष्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश जारी किये। मंगलवार को जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. रश्मि पंत अदालत में पेश हुईं।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की ओर से आज अदालत में रिपोर्ट पेश की गयी जिसमें कहा गया कि बोर्ड की ओर से पेयजल के कुल 17 नमूने (सैम्पल) लिये गये। इनमें अधिकांश में सीवर से प्रदूषण फैलने की आशंका है। आगे कहा गया कि अधिकांश पेजयल नमूना में ईकाली वैक्टीरिया पाया गया है। यह भी कहा गया कि भारतीय मानक ब्यूरो की रिपोर्ट के हिसाब से शुद्ध पेयजल में यह वैक्टीरिया उपलब्ध नहीं होना चाहिए।

जिलाधिकारी रयाल की ओर से कहा गया कि प्रदेश सरकार इस मामले में बहुत गंभीर है। प्रकरण की जांच के लिये एक कमेटी का गठन किया गया है। जांच के बाद सरकार दोषी अधिकारी की जिम्मेदारी तय करेगी और उसके खिलाफ कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।

श्री रयाल की ओर से यह भी कहा गया कि 200 से अधिक ग्रामीणों में पीलिया और हेपेटाइटिस ए के संक्रमण की शिकायत मिली है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था की गयी है और विशेषज्ञ चिकित्सकों को भी उपचार में तैनात किया गया है।

अदालत ने सरकार की ओर से गठित कमेटी पर सवाल उठाते हुए जल संस्थान के लोगों के शामिल होने पर हैरानी व्यक्त की और कहा कि इस कमेटी में पीसीबी के उच्च अधिकारी को क्यों नहीं शामिल किया गया है।

दूसरी ओर जल संस्थान की ओर से कहा गया कि संक्रमण का मूल कारण का पता नहीं चल पाया है। 12 सितम्बर के बाद उठाये गये कदमों के बाद पेयजल में प्रदूषण नहीं पाया गया है। साथ ही 570 मीटर वाली इस पेजयल लाइन को बदल दिया गया है।

अंत में अदालत ने मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन को इस पूरे प्रकरण में शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही शासन की ओर से गठित कमेटी में पीसीबी के वरिष्ठ अधिकारी को शामिल करने के निर्देश दिये हैं। मुख्य सचिव को यह भी बताना है कि इस प्रकरण में दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी है।

इसके साथ ही अदालत ने नैनीताल शहर और खुर्पाताल शहर में भी पेयजल की गुणवत्ता की जांच करने और लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश डीएम नैनीताल को दिये हैं।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल से सटे ज्योलिकोट क्षेत्र में छह गांवों में कुछ समय पहले संक्रमण फैल गया था और 200 से अधिक लोग इसकी चपेट में आ गये थे। संक्रमण के चलते एक महिला और एक युवक की मौत भी हो गयी थी।

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