नैनीताल , अप्रैल 20 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल नगर पालिका परिषद की निविदा शर्तों को चुनौती देने वाली रिट याचिका को शर्तों में आंशिक ढील दिए जाने के बाद निस्तारित कर दिया। अदालत ने नगर पालिका के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ में मुरादाबाद की मैसर्स अरुण कोहली को सोल प्रोपराइटरशिप फर्म की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने 08 अप्रैल 2026 की निविदा सूचना के क्लॉज-13 को चुनौती दी थी।
याचिका में कहा गया था कि क्लॉज-13 में निर्धारित शर्तें सीमित व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने वाली हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा कम होगी और नगर पालिका परिषद को अधिकतम राजस्व मिलने की संभावना प्रभावित होगी।
निविदा की विवादित शर्तों के अनुसार, बोलीदाता के लिए दो प्रमुख पात्रताएं निर्धारित की गई थीं-पहली, किसी स्थानीय निकाय या पहाड़ी राज्य के सरकारी विभाग से जारी प्रमाण पत्र के साथ प्रवेश शुल्क/पर्यटक शुल्क संग्रह का न्यूनतम तीन वर्ष का अनुभव; और दूसरी, एक वर्ष में कम से कम दो करोड़ रुपये या उससे अधिक मूल्य के संबंधित कार्य के निष्पादन का अनुभव।
नगर पालिका परिषद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. पटनी ने अदालत में पूरक शपथपत्र दाखिल कर स्पष्ट किया कि तीन वर्ष के अनुभव से संबंधित पहली शर्त में ढील दी गई है और केवल इसी आधार पर किसी भी बोली को खारिज नहीं किया जाएगा। हालांकि, दूसरी शर्त-एक वर्ष में दो करोड़ रुपये के कार्य अनुभव-को यथावत रखा गया है और यह सभी बोलीदाताओं के लिए अनिवार्य होगी।
इसके बाद अदालत ने नगर पालिका के बयान को स्वीकार करते हुए रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।
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