चंडीगढ़ , सितंबर 23 -- पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने की मांग करते हुए कहा है कि हालिया घटनाक्रम और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवाल लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता के लिए गंभीर हैं।
श्री रंधावा ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने नैतिक अधिकार खो दिया है और उनके चयन की प्रक्रिया पर उठे सवाल लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को कार्यपालिका के प्रभाव से मुक्त, स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाये रखना संविधान की मूल भावना के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चिंताएं जता चुके हैं और अब इन मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस हो रही है। रंधावा ने दावा किया कि विपक्ष के 73 सांसदों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव लंबित है तथा आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों ने स्थिति को और गंभीर बनाया है।
श्री रंधावा ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उच्चतम न्यायालय में चल रही सुनवाई का भी उल्लेख किया। बुधवार को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष भेजे जाने का रास्ता साफ किया। उन्होंने कहा कि मार्च 2023 के अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ फैसले में उच्चतम न्यायालय ने संसद द्वारा कानून बनाए जाने तक मुख्य चुनाव आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश की समिति का प्रावधान किया था। बाद में संसद द्वारा बनाए गए 2023 के कानून में मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री को चयन समिति में शामिल किया गया।
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