भोपाल , सितंबर 11 -- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को वर्ष की तीसरी नेशनल लोक अदालत आयोजित की जाएगी। भोपाल जिला न्यायालय सहित बैरागढ़ और बैरसिया तहसील न्यायालयों लोक अदालत में आपसी सुलह और राजीनामे के आधार पर लंबित एवं प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुनीता अग्रवाल ने बताया कि इस बार करीब 91,500 से अधिक प्रकरण सुनवाई के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें लगभग चार हजार प्रकरणों के निराकरण की संभावना है। लोक अदालत के लिए गठित विभिन्न खंडपीठों के समक्ष करीब 10 हजार लंबित न्यायालयीन प्रकरण रखे जाएंगे। इसके अलावा लगभग 80 हजार प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को आपसी सहमति से निराकरण के लिए लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नगर निगम के राजस्व एवं बकाया प्रबंधन से संबंधित करीब 500 प्रकरण, परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत चेक बाउंस के लगभग 500 प्रकरण तथा बिजली, नगर निगम और यातायात से जुड़े 500 से अधिक मामले भी सुनवाई के लिए रखे गए हैं।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित लोक अदालत में संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे। नगर निगम, विद्युत वितरण कंपनी, यातायात विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी पक्षकारों की समस्याओं के समाधान में सहयोग करेंगे। बैंक संबंधी प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए करीब 40 शासकीय एवं निजी बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी भी न्यायालय परिसर में उपस्थित रहेंगे।
लोक अदालत में समझौते के माध्यम से प्रकरणों का निराकरण कराने वाले पक्षकारों को नियमानुसार विभिन्न मामलों में राहत का लाभ मिलेगा। नगर निगम के संपत्ति कर और जल कर से संबंधित मामलों में अधिभार पर नियमानुसार छूट दी जाएगी। बिजली से जुड़े मामलों में भी नियमानुसार शमन शुल्क और अन्य देयताओं में राहत का लाभ मिल सकता है।
लोक अदालत में राजीनामे के आधार पर न्यायालयीन प्रकरण का निराकरण होने पर नियमानुसार जमा न्यायालयीन फीस वापस किए जाने का प्रावधान है। लोक अदालत का निर्णय पक्षकारों की सहमति से होता है और इसके निर्णय के विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता। इससे पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी से राहत मिलती है।
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