काठमांडू , सितंबर 06 -- नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,341 हो गई है और 4,044 लोग अभी भी लापता हैं। यह जानकारी नेपाल पुलिस ने रविवार को दी।

नेपाल पुलिस मुख्यालय से प्राप्त ताज़ा जानकारी के अनुसार, प्रभावित नदी बेसिन में खोज और बचाव अभियान अभी भी जारी हैं।बाढ़ का केंद्र रहे ग्यिरोंग पोर्ट का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में कुल 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है जिनमें से 65 अधिकारी खुद इस आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।

लापता लोगों में से 3,438 नेपाली नागरिक हैं जिनमें 2,863 पुरुष और 575 महिलाएं हैं जबकि 650 विदेशी नागरिक हैं। विदेशी नागरिकों में 269 पुरुष, 332 महिलाएं और पांच ऐसे लोग शामिल हैं जिनके बारे में जानकारी नहीं है।

पुलिस ने बताया कि अधिकारियों ने 1,341 शव बरामद किए हैं, जिनमें 523 पुरुष, 325 महिलाएं और 493 शरीर के अधूरे हिस्से प्राप्त हुए हैं। बरामद किए गए शवों में से 1,037 को दफना दिया गया है और 98 शव रिश्तेदारों को सौंप दिए गए हैं जबकि 1,297 शवों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। पीड़ितों की पहचान में मदद के लिए मेडिकल टीमों ने 2,472 डीएनए सैंपल इकट्ठा किए हैं, जिनमें पीड़ितों से लिए गए 1,286 सैंपल और रिश्तेदारों से लिए गए 1,186 सैंपल शामिल हैं। बचाव टीमों ने अब तक 9,151 घायल लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जिनमें 6,319 पुरुष, 2,778 महिलाएं और 54 ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी जानकारी नहीं है।

पुलिस मुख्यालय ने बताया कि अभी 3,098 लोग अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं। सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों के आसपास के समुदायों में 42,361 लोगों के साथ 117 जन-जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए हैं।

इस बीच, विश्व के वैज्ञानिक अब हिमालय में हुई उस विनाशकारी ऊंचाई वाले ग्लेशियर के ढहने के पीछे के कारणों का मूल्यांकन एवं आकलन कर रहे हैं, जिसके कारण बड़े पैमाने पर अचानक बाढ़ आई। शोधकर्ता 2020 में इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा जारी उन रिपोर्टों का अवलोकन कर रहे हैं जिनमें सोलुखुम्बु में लुमडिंग त्शो और होंगु-2, संखुवासभा में लोअर बरुण और मनांग में थुलागी (डोना) नामक चार झीलों को उच्च जोखिम वाला बताया गया है।

रिपोर्ट में नेपाल, तिब्बत और भारत में 47 ऐसी झीलों की पहचान की गई है जिनके फटने का खतरा ज़्यादा है। इनमें से 21 झीलें नेपाल में हैं; इनमें से आठ की पहचान हाल ही में हुई है जबकि 13 की पहचान 2011 में हुई थी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित