मोतिहारी, अगस्त 26 -- नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर प्रारंभिक आकलन में बड़ा खुलासा हुआ है। काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं जलवायु शोधकर्ता रिजन भक्त कायस्थ के अनुसार, प्रथम दृष्टया आशंका है कि हिमस्खलन और भूकम्प के कारण लेंडे नदी का मार्ग अवरुद्ध हुआ और उसके बाद अचानक पानी का दबाव बढ़ने से भोटेकोशी में भयावह बाढ़ आई। हालांकि, विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों ने इसे अभी प्रारंभिक आकलन बताया है और वास्तविक कारण की पुष्टि के लिए विस्तृत अध्ययन जरूरी बताया है।
बाढ़ की इस विभीषिका ने गंडक नदी प्रभावित बिहार के क्षेत्रों को चिंतित कर रखा है। शासन और प्रशासन अलर्ट मुद्रा में आ गए हैं।
नेपाल के एक समाचार पत्र से बातचीत में प्रो. कायस्थ ने नेपाल और चीन के वैज्ञानिकों के साथ हुई प्रारंभिक चर्चा का हवाला देते हुए कहा कि हिमस्खलन संभवत: नेपाल की ओर से आया और उसने लेंडे नदी के प्रवाह को रोक दिया। इसी दौरान तिब्बत क्षेत्र में भूकंप भी दर्ज किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, गोसाईंकुंडा से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में तिब्बत में सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था।
प्रो. कायस्थ ने कहा कि अभी यह पता लगाने में कुछ दिन लग सकते हैं कि इस घटना के पीछे किसी हिमनदी झील के फटने की भी भूमिका रही या नहीं। उनके मुताबिक इस क्षेत्र में बड़ी हिमनदी झीलें मौजूद हैं और अतीत में भी लेंडे नदी के अवरुद्ध होने तथा हिमनदी झील के फटने से अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सामान्य वर्षाजनित बाढ़ नहीं लगती। उनके अनुसार, ''यह सामान्य बाढ़ नहीं, बल्कि अचानक आई बाढ़ है।'' जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों का भी हवाला दिया गया है कि मंगलवार और बुधवार को रसुवा क्षेत्र में भारी बारिश नहीं हुई थी। विभाग के अनुसार तत्कालीन परिस्थितियों में अत्यधिक वर्षा को इस बाढ़ का प्रमुख कारण नहीं माना जा रहा है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) की प्रवक्ता शांति महात ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) को चीन से प्रारंभिक सूचना मिली है कि हिमस्खलन के कारण नदी का मार्ग अवरुद्ध हुआ था। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि नेपाल सरकार को अभी तक इस संबंध में औपचारिक सूचना नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल यह केवल प्रारंभिक अनुमान है और सरकार का पूरा ध्यान राहत एवं बचाव कार्यों पर है। घटना के वास्तविक कारण का पता विस्तृत जांच और तकनीकी अध्ययन के बाद ही चल सकेगा।
जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग ने भी संभावना जताई है कि नेपाल या तिब्बत के किसी हिस्से में हिमनदी झील के फटने की घटना हुई हो सकती है। विभाग के अनुसार इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तिमुरे क्षेत्र में मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने दावा किया कि बाढ़ से पहले उसे तेज कंपन महसूस हुआ। इसके बाद ऊपर की दिशा से अचानक भारी जलप्रवाह और मलबे का सैलाब आया। चारों ओर धुएं और मलबे के कारण अंधेरा छा गया तथा लोगों को कुछ समझने का मौका तक नहीं मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लोग जान बचाने के लिए तिमुरे बाजार से ऊपर जंगल की ओर भागे। कई लोगों को यह तक पता नहीं था कि उनके साथ मौजूद लोग कहां हैं और कौन सुरक्षित बचा है।
भोटेकोशी की बाढ़ ने तिमुरे बाजार, सीमा शुल्क यार्ड, दुकानों, कार्यालयों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार पूरा इलाका बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नुवाकोट के सहायक मुख्य जिला अधिकारी कृष्ण प्रसाद हुमागाईं ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि बैंक, पुल, बाजार और बस्तियां तक क्षतिग्रस्त हुई हैं। उनके अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर नुकसान पहले कभी नहीं देखा गया।
बाढ़ के दौरान सीमा शुल्क यार्ड में खड़े बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहन और ट्रक भी बह गए।
एक अधिकारी के अनुसार वहां 300 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन और ट्रक सीमा शुल्क प्रक्रिया से गुजर रहे थे। इसके अलावा तिमुरे बाजार और रसुवागढ़ी की ओर विभिन्न स्थानों पर खड़े अन्य वाहनों का भी कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
बाढ़ के बाद स्थानीय लोगों, सेवा लेने आए लोगों और सीमा शुल्क कर्मचारियों समेत करीब 40 लोगों के बाजार से ऊपर जंगल में फंसे होने की सूचना है। वे सुरक्षित स्थान पर शरण लिए हुए हैं और बचाव दल की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सीमा शुल्क कार्यालय के कुछ कर्मचारियों से संपर्क हो पाया है, लेकिन नेपाल-चीन मितेरी पुल पर ड्यूटी कर रहे कई कर्मचारियों से अब तक संपर्क नहीं हो सका है। इससे लापता लोगों की संख्या को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी ने शिकायत की है कि बाढ़ से पहले उन्हें किसी तरह की चेतावनी नहीं मिली थी। उनका कहना है कि यदि समय रहते सूचना मिलती तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा सकता था।
नेपाल में भोटेकोशी और अन्य नदियों में अचानक आई बाढ़ ने भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ा दी है। नेपाल से आने वाले जलप्रवाह में अप्रत्याशित वृद्धि होने की स्थिति में बिहार की नदियों के जलस्तर पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से गंडक नदी और वाल्मीकिनगर बैराज की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन पहले ही संभावित खतरे को देखते हुए अरेराज, संग्रामपुर, केसरिया और पहाड़पुर अंचलों में सतर्कता बढ़ा चुका है। गंडक तटबंधों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जागरूक करने के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को पेट्रोलिंग के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी सौरभ सुमन ने बुधवार की संध्या एक प्रेस कांफ्रेन्स कर सम्भावित खतरा से निपटने की तैयारियों की जानकारी दी और किसी भी अफवाह से बचने की अपील की।उन्होंने बताया कि प्रशासन ने मेडिकल टीमों को आवश्यक दवाओं के साथ तैयार रखने और स्थानीय अधिकारियों को आपात स्थिति में राहत एवं बचाव की व्यवस्था तत्काल सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूरी तरफ नेपाल में अभी भी राहत और बचाव अभियान जारी है। इस बीच विशेषज्ञों की नजर इस बात पर टिकी है कि भोटेकोशी की इस असाधारण बाढ़ के पीछे केवल हिमस्खलन था, हिमनदी झील का फटना था या दोनों घटनाओं ने मिलकर इस विनाशकारी जलप्रलय को जन्म दिया। जब तक वैज्ञानिक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इस आपदा का वास्तविक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं माना जा रहा है।
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