काठमांडू , सितंबर 16 -- नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को दो अलग-अलग बचाव अभियानों में चिलिमे जलविद्युत परियोजना तथा त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से कुल नौ शव निकाले गये।
नेपाल एवं भारत के बचाव दल के एक संयुक्त खोज-बचाव अभियान में चिलिमे जलविद्युत परियोजना से चार शव निकाले गये। दूसरी ओर, 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से पांच शव बरामद किये गये। इलाके में 26 अगस्त को आयी भीषण बाढ़ के करीब तीन सप्ताह बाद ये शव मिले हैं।
रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने बताया कि जारी खोज एवं बचाव अभियान के दौरान नेपाली सेना और जलविद्युत परियोजना की संयुक्त टीम ने त्रिशूली की ऑडिट-3 सुरंग से शव बरामद किये। उन्होंने बताया कि बचाव दल ने बुधवार को पांचों शवों को सुरंग से बाहर निकाल लिया। मृतकों की पहचान की जा रही है। तलाशी अभियान जारी रहने के साथ मामले में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, चिलिमे जलविद्युत परियोजना बचाव अभियान के बारे में बताया गया कि बचावकर्मी खुदाई करने वाली मशीन एवं लोडर का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसे हेलिकॉप्टर से स्याफरुबेसी ले जाकर मलबा हटाया जा रहा था। मलबा हटाने के दौरान, बचाव कर्मियों को सुरंग के मुहाने से लगभग 70 मीटर अंदर से पानी बहता हुआ मिला। वे उस रास्ते से अंदर गये और लगभग 130 मीटर तक तलाशी ली, लेकिन पानी का स्तर बढ़ने से वह सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया। इससे खुदाई करने वाली मशीन का काम करना मुश्किल हो गया। गोताखोरों समेत एक टीम बुधवार को उस रास्ते से अंदर गयी और सुरंग के दूसरे छोर की ओर तलाशी ली, जहां उन्हें चार शव मिले। एक शव को बाहर निकाल लिया गया है, जबकि बाकी तीन को निकालने की कोशिशें जारी हैं। तलाशी अभियान अभी भी चल रहा है।
नेपाल एवं चीन में 26 अगस्त को आयी बाढ़ से रसुवा और भोटेकोशी तथा त्रिशूली नदी के किनारे स्थित अन्य जिलों में भारी तबाही हुई थी।
नक्सल में नेपाल पुलिस मुख्यालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,405 से ज़्यादा शव या अवशेष बरामद किये गये हैं।
केंद्रीय पुलिस प्रवक्ता और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (डीएसपी) अविनायण काफ्ले ने बताया कि आधिकारिक तौर पर लापता लोगों की सूची में 4,084 लोग शामिल हैं। बाढ़ में घायल हुए और सुरक्षित बचाये गये लोगों की संख्या 9,287 है। पुलिस ने बताया कि अब तक 1,230 शवों का डीएनए प्रोफ़ाइलिंग किया गया है और भविष्य में पहचान के लिए उन्हें सुरक्षित रूप से दफनाया गया है।
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