काठमांडू , अगस्त 26 -- नेपाल-चीन सीमा के पास बुधवार को भूस्खलन और भयानक बाढ़ की घटना में कम से कम 384 पर्यटक और यात्री लापता बताए गए हैं, जबकि आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

इस घटना से आसपास भारी तबाही हुई है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, लापता यात्रियों में नेपाल, भारत, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिक शामिल हैं। कई अन्य लापता लोगों की राष्ट्रीयता की अभी पुष्टि नहीं हुई है। प्रभावित क्षेत्र में मौजूद या वहां से गुजर रहे लोगों की स्थिति का पता लगाने के लिए सीमा के दोनों ओर खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है।

नेपाल पुलिस के अनुसार, नुवाकोट और धादिंग जिलों से आठ शव बरामद किए गए हैं। बाढ़ में पुलिस थाने, सीमा शुल्क केंद्र और निजी मकानों समेत कई ढांचे बह गये हैं। अधिकारियों ने मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है।

चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार दक्षिण-पश्चिम चीन के शिजांग स्वायत्त क्षेत्र में ग्यिरोंग बंदरगाह के पास भी बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क, संचार और बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। वहां भी कई लोगों के लापता होने की आशंका है।

भारत की सीमा से सटे चितवन समेत निचले इलाकों के लोगों के लिए आपात चेतावनी जारी की गई है। बचाव दलों को तैनात किया गया है।जिनमें हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं, सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों ने भी राहत एवं बचाव अभियान में हिस्सा लिया।

नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता शैलेंद्र थापा ने कहा कि भोटेकोशी नदी के ऊपरी क्षेत्र में ग्लेशियर झील के फटने (जीएलओएफ) की घटना बाढ़ और तबाही का संभावित कारण हो सकती है। आपदा में घायलों के इलाज के लिए काठमांडू के सरकारी अस्पतालों और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संचालित चिकित्सा केंद्रों को तैयार रखा गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल सरकार ने आपात मंत्रिमंडल बैठक बुलाई है, जबकि गृह मंत्री सुधन गुरूंग से संसद को नुकसान और जनहानि की जानकारी देने की उम्मीद है। रसुवागढ़ी क्षेत्र लांगटांग क्षेत्र की ओर जाने वाले पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। इसका इस्तेमाल चीन जाने वाले यात्रियों द्वारा भी किया जाता है, जिनमें कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा करने वाले लोग शामिल हैं।

अधिकारियों का कहना है कि आपदा से हुए नुकसान और लापता लोगों की संख्या का आकलन करने के साथ खोज एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित