नयी दिल्ली , जून 07 -- नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल का भारत दौरा प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की नयी सरकार की ओर से पहला उच्च स्तरीय संवाद है। यह दौरा सीमा मुद्दों पर हालिया तनाव के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के नेपाल के प्रयास का संकेत देता है।

द्विपक्षीय संबंधों को भू-राजनीतिक चश्मे से देखने से इनकार करते हुए श्री खनाल ने संवाद, आपसी विश्वास और साझा समृद्धि पर जोर दिया। इसके जरिये वे भारत को यह भरोसा दिलाने के उत्सुक दिखे कि नेपाल की नयी सरकार राष्ट्रवादी बयानबाजी के बजाय व्यावहारिक जुड़ाव को प्राथमिकता देती है। नेपाल यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद व्यापार, यातायात और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को प्रभावित न करें। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जो हाल के वर्षों में भारत-नेपाल संबंधों को लगातार नये आयाम दे रहे हैं।

नेपाल का यह संदेश पूरी तरह से सुलह का रुख दिखाने वाला था। श्री खनल ने कहा कि नेपाल भारत को '21वीं सदी की भू-राजनीति के पूर्वाग्रह और अति-संवेदनशील चश्मे' से देखने से इनकार करता है और इसके बजाय राजनयिक माध्यमों से सीमा मुद्दों को सुलझाने का लक्ष्य रखता है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अगुवाई वाली सरकार आर्थिक कूटनीति पर केंद्रित एक व्यावहारिक विदेश नीति अपना रही है। यह प्रशासन 'पुराने बोझ' को ढोये बिना नयी शुरुआत करना चाहता है, हालांकि वह लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों को सुलझाने का प्रयास जारी रखेगा। इसके साथ ही, यह सरकार भारत और अन्य पड़ोसी देशों के प्रति अपने दृष्टिकोण के मुख्य स्तंभों के रूप में मजबूत आर्थिक जुड़ाव, क्षेत्रीय संपर्क और निवेश-संचालित सहयोग पर जोर दे रही है।

विश्लेषकों के अनुसार नेपाल नहीं चाहता कि भारत के साथ उसके संबंधों को मुख्य रूप से बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा के नजरिये से देखा जाए, खासकर दक्षिण एशिया में बढ़ती रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच। इसके बजाय, काठमांडू बाहरी भू-राजनीतिक विचारों के बजाय भूगोल, आर्थिक परस्पर निर्भरता और गहरे जन-केंद्रित संबंधों के आधार पर रिश्तों को आगे बढ़ाने का इच्छुक दिख रहा है। संवाद और 'खुले दिल' से विवादों को सुलझाने पर श्री खनल का जोर सीमा मुद्दों पर प्रधानमंत्री शाह की हालिया टिप्पणियों से पैदा हुई चिंताओं को कम करने के उद्देश्य से भी था। उनके बयानों से संकेत मिलता है कि काठमांडू विवादास्पद मामलों को अलग रखने और उन्हें व्यापक सहयोग पर हावी होने से रोकने की कोशिश कर रहा है।

श्री खनल ने कहा कि नेपाल वर्षों के राजनीतिक तनाव को भुलाकर एक नया अध्याय शुरू करने और व्यावहारिकता, ठोस नतीजों और आपसी विकास पर टिके संबंध बनाने के लिए तैयार है। रविवार को अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा का समापन करते हुए उन्होंने संदेश दिया कि नेपाल खुले दिल और मतभेदों को रचनात्मक रूप से सुलझाने की इच्छा के साथ आया है। उन्होंने कहा, "जब हम खुले दिल से बैठते हैं, तो कोई भी समस्या बहुत बड़ी नहीं होती और कोई भी सीमा बहुत जटिल नहीं होती।" हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए उनकी इस बात का विशेष महत्व है।

कुछ हफ़्ते पहले, प्रधानमंत्री शाह ने भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया था। इस वजह से दोनों देशों के राजनयिक हलकों की नजरें विदेश मंत्री खनल के इस दौरे पर टिकी हुई थीं। नेपाल के विदेश मंत्री के रुख से साफ जाहिर हो रहा था कि वे इस रिश्ते को सुधारने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। श्री खनल ने कहा, "हम भारत को 21वीं सदी की भू-राजनीति के पूर्वाग्रह और अति-संवेदनशील चश्मे से देखने से साफ इनकार करते हैं।" इसके बजाय, उन्होंने आर्थिक, तकनीकी और साझा प्राथमिकताओं पर आधारित एक रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने कहा, "हम खुले दिल, साफ नजरिये और सिर्फ एक पारदर्शी एजेंडे के साथ भारत की तरफ देखते हैं और वह एजेंडा है- नेपाल का आर्थिक कायाकल्प।"भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर पांच जून से शुरू हुआ यह दौरा मार्च में कार्यभार संभालने के बाद से शाह सरकार की ओर से उच्चतम स्तर का पहला राजनयिक संवाद है। नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, जो साफ-सुथरे शासन और योग्यता के वादे के साथ सत्ता में आयी है, वहां की एक नयी राजनीतिक ताकत का प्रतिनिधित्व करती है। यह युवा और सुधारवादी सोच वाली पार्टी है और अगर श्री खनल के बयानों को संकेत माना जाए तो नेपाल भारत से रिश्तों को एक नयी परिभाषा देने के लिए बेहद उत्सुक है।

विदेश मंत्री ने कहा, "मैं नेपाल की एक बिल्कुल नयी राजनीतिक हकीकत का प्रतिनिधित्व करता हूं। हमारा उभार हमारे नागरिकों के उस असाधारण जनादेश की बदौलत हुआ है, जिसका मुख्य आधार सुशासन, योग्यता और जवाबदेही है।" उन्होंने कहा कि यही सोच हमारी विदेश नीति में भी झलकती है। उग्र-राष्ट्रवादी बयानबाजी में उलझने के बजाय, हम पूरी ईमानदारी से चुनौतियों के समाधान के लिए एक शांत, आंकड़ों और सबूतों पर आधारित व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से छह जून को हुई उनकी बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई। इसमें व्यापार, सीमा पार यातायात, ऊर्जा, जल संसाधन और जन-केंद्रित संपर्क शामिल थे।

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