नैनीताल , मार्च 18 -- उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने नेपाली मूल के निवासियों द्वारा नैनीताल के आसपास सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण और गलत तरीके से दस्तावेज तैयार करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार से चार सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
नैनीताल निवासी पवन जाटव की ओर से इस मामले को चुनौती दी गई है और इस प्रकरण पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ में सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नेपाल से आए लोगों ने नैनीताल शहर और जिले के ग्राम सभा खुरपाताल के बजून चौराहे के पास करीब 25 परिवारों ने सरकारी एवं नजूल भूमि पर कब्जा करके आवासीय निर्माण किया है।
इन लोगों ने न तो विधिवत कोई नागरिकता हासिल की है और न ही कोई आवेदन किया है। साथ ही अवैध तरीके से यहां के दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोट पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, स्थाई निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, स्वास्थ्य सेवाएं कार्ड तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ भी लिया जा रहा है। यही नहीं मतदाता सूची में भी नाम दर्ज कर लिया और पेयजल, बिजली के कनेक्शन आदि अवैध तरीके से हासिल भी कर लिए।
इस संबंध में जिला प्रशासन एवं उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई परन्तु कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने अदालत से अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
याचिकाकर्ता की ओर से मामले की जांच करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
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