येरूशलेम , अगस्त 04 -- इजरायल को साधने की कोशिशों के बीच 'बोर्ड ऑफ पीस' गाजा से सेना वापसी की शर्तों पर थोड़ा झुकता नज़र आ रहा है। अमेरिकी समर्थन वाले इस बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को यहां इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की, जिसके तुरंत बाद ही इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) की वापसी की शर्तों पर बोर्ड अपने कदम पीछे खींचता दिख रहा है।

बैठक के बाद जारी नये बयान में स्पष्ट किया गया है कि हमास जब तक अपने सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म नहीं कर देता, तब तक इजरायली सेना पीछे नहीं हटेगी। समझौते के मूल शर्तों से बोर्ड के पीछे हटने से हमास के साथ जारी शांति वार्ता में नया पेंच फंस सकता है, क्योंकि हमास अब तक चरणबद्ध तरीके से सेना वापसी के मूल फॉर्मूले पर ही सहमत हुआ था।

बैठक के बाद जारी बयान में बोर्ड ने कहा कि इजरायली सेना 'येलो लाइन' के पार तभी वापस लौटेगी, जब हमास अपने सैन्य ढांचे को पूरी तरह से निष्क्रिय कर देगा।

बयान में कहा गया है, "गलत रिपोर्टों के विपरीत, हम स्पष्ट करते हैं कि मध्यस्थों से हमास के वादे के अनुसार सैन्य ढांचे को पूरी तरह से निष्क्रिय किये जाने के बाद ही आईडीएफ की येलो लाइन से पीछे वापसी होगी। यह नियम हल्के हथियारों, भारी हथियारों और सुरंगों सभी पर समान रूप से लागू होता है।"अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के समय तय हुई 'येलो लाइन' अब पहले जैसी नहीं रही। गाजा को इजरायल और हमास के नियंत्रण क्षेत्रों में बांटने वाली यह सीमा रेखा पिछले एक वर्ष में काफी बदल गयी है। इजरायल ने हमास के कब्जे वाले इलाकों में आगे बढ़ते हुए अब गाजा के 60 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर अपना नियंत्रण बना लिया है।

'बोर्ड ऑफ पीस' के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' को बताया था कि पिछले हफ्ते घोषित हमास निशस्त्रीकरण ढांचे की शर्तों के तहत इजरायल से उम्मीद थी कि वह येलो लाइन तक पीछे हट जायेगा, हालांकि सोमवार के बयान में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

कल के बयान के पहले ड्राफ्ट में 'आईडीएफ की पूर्ण वापसी' का जिक्र था। इससे यह संदेश जा रहा था कि हमास के पूरी तरह निशस्त्र होने से पहले ही इजरायली सैनिकों की वापसी या बदलाव की शुरुआत हो सकती है, लेकिन जारी करने के तुरंत बाद ही 'पूर्ण' शब्द को हटा लिया गया।

बयान में यह स्पष्ट बदलाव तब देखने को मिला है, जब बोर्ड इजरायल से मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहा है। इजरायल सरकार ने हमास के पूरी तरह निशस्त्र होने से पहले सेना की किसी भी वापसी को बार-बार खारिज किया है।

यह संशोधन हालांकि हमास के साथ प्रयासों को जटिल बना सकता है, क्योंकि वह इजरायली बलों की चरणबद्ध वापसी और उसके साथ-साथ धीरे-धीरे हथियारों को निष्क्रिय किये जाने की मूल रूपरेखा पर सहमत हुआ था।

श्री नेतन्याहू के साथ कल हुई बैठक को "सकारात्मक" बताते हुए बोर्ड ने दोहराया कि उसका मुख्य उद्देश्य अपरिवर्तित है।

बयान में कहा गया है, "लक्ष्य स्पष्ट है और इस पर कोई सवाल नहीं है। गाजापट्टी में हथियारों को पूरी तरह से समाप्त करना और बंदूक के शासन से हटकर नागरिक शासन की ओर बढ़ना। इस तक पहुंचना एक प्रक्रिया होगी और उस प्रक्रिया को काम के अगले चरण में निर्धारित किया जायेगा।"बोर्ड ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस योजना का क्रियान्वयन दोनों पक्षों के सहमत रूपरेखा के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने पर निर्भर करता है।

'इजरायल हयोम' अखबार के अनुसार, श्री नेतन्याहू ने श्री म्लादेनोव से कहा है कि जब तक हमास सुरक्षा के लिए खतरा बना रहेगा, तब तक इजरायल न तो गाजा में सैन्य अभियानों को रोकेगा और न ही येलो लाइन तक पीछे हटेगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायल ने बोर्ड और अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष औपचारिक आपत्तियों की एक सूची सौंपी है। इजरायल का तर्क है कि वह काहिरा में हुई वार्ताओं में सीधे तौर पर शामिल नहीं था, इसलिए प्रस्ताव को अंतिम रूप दिये जाने से पहले वह उसमें अपने सुझाव शामिल नहीं कर सका।

चर्चा से अवगत एक इजरायली अधिकारी ने यह भी कहा कि इजरायल ने हमास के निशस्त्रीकरण की निगरानी करने वाली 'अंतरराष्ट्रीय सत्यापन समिति' में कतर और तुर्की (तुर्किये) के प्रतिनिधियों को शामिल करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जतायी है।

दोनों देशों ने हमास नेताओं की मेजबानी की है, जबकि सात अक्टूबर, 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए आतंकवादी हमले के बाद से इजरायल और तुर्की के संबंधों में जबरदस्त खटास आयी है।

इजरायल ने हमास के हथियारों को स्थायी रूप से नष्ट करने के बजाय उन्हें सुरक्षित भंडार में रखने के प्रस्ताव पर भी चिंता व्यक्त की है।

बैठक के बाद श्री म्लादेनोव ने बहुत तेज प्रगति की उम्मीद न करने की चेतावनी दी है।

श्री म्लादेनोव ने 'एक्स' पर लिखा, "येरूशलेम में यह एक लंबा दिन था। यह कठिन चरण की शुरुआत है और मैंने कभी इसके विपरीत होने का नाटक नहीं किया।"उन्होंने कहा, "अब हम जो कुछ भी कर रहे हैं, उसमें से बहुत कुछ नाटकीय नहीं है। यह धीमी, थकाऊ और तकनीकी प्रक्रिया है।"बोर्ड के अनुसार, वरिष्ठ सलाहकार जोश ग्रुएनबौम और सुरक्षा प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मार्क श्वार्ट्ज ने द्विपक्षीय दृष्टिकोण के माध्यम से गाजा में शांति, सुरक्षा, शासन और पुनर्निर्माण प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर बल दिया।

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