अलवर , मार्च 26 -- राजस्थान में अलवर में नील गायों की हत्या संबंधी कानून को लेकर गुरुवार को दिगम्बर जैन महासमिति अलवर की ओर से मन्नी का बड़ स्थित अहिंसा सर्किल पर धरना दिया गया।
महासमिति ने प्रदर्शन करके राज्य सरकार से गुहार लगायी गयी कि नील गायों की हत्या संबंधी कानून को सरकार वापिस ले ताकि नील गायों की रक्षा हो सके।
सुबह नौ बजे शुरू हुए इस धरने में जहां जैन समाज के नर-नारियों ने हिस्सा लिया, वहीं विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल सहित जैन समाजों के पदाधिकारी,चिकित्सक, पत्रकार, किसान नेता, व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि आदि भी शामिल हुए। धरने पर बैठे महिला-पुरूषों ने काले बैज लगाये हुए थे।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि फसल रक्षा के नाम पर सरकार ने जिस तरह ये कानून बनाया है, उसमें पिछले करीब तीन दशक में एक भी ऐसा मामला नहीं आया, जिसमें किसी किसान ने अपनी फसल बचाने के लिये सरकार से नील गाय की हत्या की अनुमति मांगी हो, तो फिर इस कानून का अर्थ क्या है।
वक्ताओं ने कहा कि इस कानून की आड़ में मांस का व्यवसाय करने वाले अपना काम कर रहे हैं, और राम भक्त होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार नील गायों की हत्या संबंधी कानून को वापिस नहीं ले रही है।
नील गाय रक्षा आंदोलन से जुड़े ओमप्रकाश गुप्ता ने नील गाय रक्षा को लेकर चलाये जा रहे आंदोलन के बारे में बताया कि सरकार से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सरकार इस कानून को वापिस नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस कानून से किसानों का क्या भला करना चाहती है। सरकार अगर किसानों का भला करना चाहती है तो उन किसानों को मुआवजा दे जिन किसानों की फसल को वन्य जीव नष्ट कर देते हैं, लेकिन सरकार का निशाना सिर्फ नील गाय ही क्यों है। वक्ताओं ने तुरन्त प्रभाव से इस कानून को वापिस लेने की मांग की।
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