चेन्नई , अप्रैल 30 -- तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार को कहा कि पिछले कुछ दिनों से नीलगिरी जिले में लगी जंगल की भीषण आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू के अनुसार, निरंतर प्रयासों के बाद नीलगिरी के जंगलों की आग को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस आग से किसी भी मानवीय बस्ती पर कोई असर नहीं पड़ा है और न ही शोला वनस्पतियों में आग लगी है।
नीलगिरी वन प्रभाग में पार्सन्स वैली रेंज के वेनलॉक डाउन्स रिजर्व फॉरेस्ट में 15 अप्रैल, 2026 को आग लगने की सूचना मिली थी और तुरंत स्थानीय वन टीम को तैनात किया गया था। आग पर नियंत्रण पाने के लिए राज्य भर से 500 से अधिक वन कर्मियों और इलाके का अनुभव रखने वाले छह जिला वन अधिकारियों की कई टीमों को लगाया गया। इसके अलावा, सात राज्य वन अग्नि प्रतिक्रिया वाहनों को महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया।
इसके अलावा, तमिलनाडु राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के 60 सदस्यों वाली दो टीमें और तमिलनाडु अग्निशमन एवं बचाव विभाग की टीमें भी इस अभियान में शामिल थीं। स्थानीय पर्यावरण विकास समितियों के 100 से अधिक सदस्यों ने भी इस विशाल और चुनौतीपूर्ण अभियान में वन विभाग की सहायता की।
आग की तीव्रता को देखते हुए मानवीय संसाधनों से परे सहायता की आवश्यकता थी, इसलिए हवाई सहायता मांगी गई। नीलगिरी के जिला वन अधिकारी के अनुरोध और आग के फैलाव को देखते हुए जिलाधिकारी ने राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसी से हेलीकॉप्टर के लिए हवाई सहायता का अनुरोध किया।
भारतीय वायु सेना की टीम ने 25 अप्रैल को हेलीकॉप्टर का उपयोग करके आग बुझाने में मदद की। हालांकि, प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण बाद में हेलीकॉप्टर का उपयोग बंद कर दिया गया था।
यह आग मुख्य रूप से जमीनी आग (ग्राउंड फायर) थी, जिसे सेस्ट्रम, यूलेक्स, स्कॉच ब्रूम और सूखे वैटल कचरे जैसी आक्रामक खरपतवारों ने बढ़ावा दिया। इस आग से कोई मानवीय बस्ती प्रभावित नहीं हुई और शोला वनस्पतियों में कोई आग नहीं लगी है।
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