नयी दिल्ली , जून 12 -- नीति आयोग ने शुक्रवार को पूर्वोत्तर के राज्यों में विकास, नवाचार और चुनौतियों पर इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बैठक की।

बैठक में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी तथा आयोग के सदस्यों और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उनसे बातचीत के लिए मौजूद थे। नीति आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि बैठक में "रचनात्मक और परिणामोन्मुखी" चर्चा हुई।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने जलविद्युत क्षेत्र सहित राज्य की अपार संभावनाओं की चर्चा करते हुए मानव संसाधनों के कौशल और क्षमता विकास को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य में क्रियान्वित 'सरकार आपके द्वार', 'सेवा आपके द्वार' और 'कैबिनेट आपके द्वार' की जानकारी दी जिनका उद्देश्य कुशल सेवा वितरण और जन शिकायतों का शीघ्रता से निवारण सुनिश्चित करना है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि क्षेत्रीय असमानताओं से बचने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए विकास में संतुलन आवश्यक है। उन्होंने असम-नागालैंड सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज तेल संचालन सुगम बनाने के लिए केंद्र सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच गुरुवार को हस्ताक्षरित ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन की सराहना की और इसे सहयोगात्मक विकास का आदर्श रूप बताया। उन्होंने कहा कि असम सामाजिक विकास संकेतकों में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है और देश में सबसे तेज विकासशील राज्य बनकर उभरा है। इस प्रगति को जारी रखने तथा इसे और अधिक गति देने के लिए उन्होंने क्षेत्रीय आवश्यकताएं पूरी करने पर जोर दिया।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि आर्थिक विकास सार्थक मानवीय विकास में परिवर्तित होना चाहिये। उन्होंने मेघालय की दृष्टियोजना 'ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी 2032' साझा की, जिसका उद्देश्य विकसित मेघालय का लक्ष्य हासिल करना है। श्री संगमा ने महत्वपूर्ण अवसंरचना निर्माण और विकास गति में बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं की अहम भूमिका की चर्चा की। उन्होंने व्यापार, निर्यात और पर्यावरण के क्षेत्रों में पूर्वोत्तर राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने का पक्ष रखते हुये इस क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकता अनुरूप नीतियां बनाने की आवश्यकता बतायी।

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने राज्य की अपार पर्यटन क्षमता का उल्लेख किया और स्वयं सहायता समूहों तथा स्थानीय समुदायों द्वारा संचालित सफल सामुदायिक पर्यटन मॉडल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में मिजोरम में पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने मिजोरम जिंजर मिशन के लिए भी केंद्र का समर्थन मांगा और पूर्वोत्तर राज्यों की पात्रता संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं में अधिक अनुकूलता की आवश्यकता पर जोर दिया।

नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो ने राज्य में विकास की गति जारी रखने के लिए 15वें वित्त आयोग की सहायता जारी रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने नयी ढांचागत परियोजनाओं, आर्थिक गतिविधियों में विस्तार, तेल एवं गैस की खोज और कृषि क्षेत्र सुदृढ़ बनाने की संभावनाओं का उल्लेख किया। श्री रियो ने परिवहन बुनियादी अवसंरचना में सुधार और नागालैंड के कॉफी जैसे उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता बतायी।

मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने राज्य में पुनर्वास और पुनर्स्थापन उपायों का उल्लेख किया। पुनर्निर्माण और आवास संबंधी पहल के समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने सुदृढ़ निगरानी तंत्र स्थापित करने के महत्व पर जोर दिया। श्री वाई. खेमचंद सिंह ने प्रभावित समुदायों को सहायता देने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर दिया।

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने राज्य के विकास में पर्यटन, संपर्क साधन और डिजिटल अवसंरचना की महत्वपूर्ण भूमिका की चर्चा की। उन्होंने समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहुंच और आर्थिक अवसर बढ़ाने के लिए व्यावसायिक तौर पर लाभप्रद हवाई संपर्क और बेहतर डिजिटल अवसंरचना की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री तमांग ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के लिए पूर्वोत्तर औद्योगिक विकास योजना (एनईआईडीएस) जारी रखने की बात कही। पूर्वोत्तर क्षेत्र की विशिष्ट जनसांख्यिकीय और पारिस्थितिक वास्तविकताएं प्रतिबिंबित करने वाले नीतिगत ढांचे के महत्व की चर्चा करते हुए उन्होंने सतत विकास सुनिश्चित करने पर बल दिया।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने राज्य की भौगोलिक कठिनाइयों, विस्तृत अंतरराष्ट्रीय सीमा और कौशल विकास में कमी की बात कही और आर्थिक विकास तथा निवेश को गति देने के लिए लक्षित उपाय करने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने कहा कि एकीकृत सीमा चौकी, रेल सेवाएं और हवाई संपर्क सहित व्यापार और संपर्क साधन अवसंरचना बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

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