पटना, मार्च 16 -- बिहार की राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित एक हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में सोमवार को बालकों का लैंगिक अपराध से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) की विशेष अदालत ने जेल में बंद अभियुक्त हॉस्टल मलिक की जमानत याचिका खारिज कर दी।
पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत ने मामले के जेल में बंद अभियुक्त एवं शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष कुमार रंजन की नियमित जमानत याचिका पर तीन दिनों तक सुनवाई करने के बाद 12 मार्च 2026 को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पटना पुलिस, विशेष जांच दल (एसआईटी) और केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तीनों के अनुसंधानकर्ताओं को अदालत में बुलाकर उनका पक्ष सुना था।
विशेष अदालत ने क्षेत्राधिकार के प्रश्न पर भी सभी पक्षों को सुना था। इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्त एवं पीड़िता के वकील को भी कई बार सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखा था। अदालत ने आज पारित किए गए आदेश में सबसे पहले न्यायालय के क्षेत्राधिकार के प्रश्न पर अलग से निर्णय देते हुए कहा कि इस विशेष अदालत को इस मुकदमे की सुनवाई करने की अधिकारिता है क्योंकि इसकी स्थापना पॉक्सो एक्ट के तहत की गई है जो एक विशेष अधिनियम है। उसके बाद जमानत अर्जी पर विस्तार से दोनों पक्षों के दलीलों की चर्चा करते हुए एवं परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए मामले का अनुसंधान प्रारंभिक अवस्था में होने के कारण अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज कर दी लेकिन अभियुक्त छूट दी है कि वह मुकदमे में आगे की कार्रवाई में उचित परिस्थितियां आने पर जमानत की प्रार्थना कर सकता है।
गौरतलब है कि नौ जनवरी 2026 को पटना के चित्रगुप्त नगर थाना की पुलिस ने मृतका के पिता के फर्दबयान पर मामला दर्ज किया था। आरोप के अनुसार मृतिका अपने हॉस्टल में बेहोश पायी गयी थी। मृतका के पिता ने अपनी पुत्री के शरीर पर चोट का निशान पाये जाने की बात कही थी। साथ ही, उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने का प्रयास किये जाने का भी शक जाहिर किया था। बाद में इलाज के दौरान छात्रा की मृत्यु अस्पताल में हो गई थी। बिहार सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी। जिसके बाद सीबीआई अपनी प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
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