पटना , अप्रैल 16 -- बिहार की राजधानी पटना के एक हॉस्टल में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जेल में बंद हॉस्टल मलिक को पटना की एक विशेष अदालत ने गुरूवार को जमानत पर मुक्त करने का आदेश दिया।

बालकों का लैंगिक अपराध से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत में मामले के जेल में बंद अभियुक्त मनीष रंजन की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187 के तहत एक आवेदन दाखिल कर उसके वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल 15 जनवरी 2026 से जेल में बंद है और केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है जबकि 90 दिन की निश्चित अवधि बीत चुकी है, इसलिए उनके मुवक्किल को जमानत पर मुक्त किया जाए।

आरोप पत्र दाखिल करने के लिए निश्चित 90 दिन की अवधि में आरोप पत्र नहीं दाखिल होने के कारण अदालत ने अभियुक्त को 25 हजार रूपये के निजी मुचलके के साथ इसी राशि के दो जमानदारों का बंध पत्र दाखिल करने पर जमानत पर मुक्त किए जाने का आदेश दिया ।

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्त बिना इस अदालत की अनुमति के न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं जाएगा, अनुसंधान में सहयोग करेगा ,साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा ,जब भी अनुसंधान में उसकी आवश्यकता होगी अनुसंधानक को सहयोग करेगा और पटना उच्च न्यायालय में दाखिल की गई याचिका को वापस लेकर एक सप्ताह के अंदर आदेश इस अदालत में दाखिल करेगा।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस अदालत के निर्देश के बावजूद अनुसंधान पूरा कर समय पर आरोप पत्र नहीं दाखिल किया गया । अदालत ने सीबीआई के आरक्षी अधीक्षक को इस बात की प्रशासनिक समीक्षा करने का निर्देश दिया है कि समय पर आरोप पत्र क्यों नहीं दाखिल किया गया।

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