भोपाल , अप्रैल 10 -- मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी में प्रशिक्षणरत 44वें एवं 45वें बैच के प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि निष्पक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता ही एक पुलिस अधिकारी की वास्तविक पहचान है।
नवीन पुलिस मुख्यालय में आयोजित संबोधन सत्र में कुल 49 प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे। डीजीपी ने अधिकारियों को बधाई देते हुए कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण समर्पण और निष्पक्षता के साथ करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है, इसलिए अधिकारियों को अपनी व्यावसायिक दक्षता और तकनीकी कौशल को लगातार अद्यतन करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों का लाभ लेकर अपनी क्षमता बढ़ाने की सलाह दी।
डीजीपी ने पुलिस सेवा को समाज सेवा का सशक्त माध्यम बताते हुए गरीब और जरूरतमंद वर्ग के प्रति संवेदनशीलता बरतने तथा अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने पर जोर दिया। उन्होंने कानून और प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने, नए आपराधिक कानूनों की जानकारी रखने और भ्रष्टाचार से दूर रहने की नसीहत दी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में मीडिया, सोशल मीडिया और न्यायालयों की सतत निगरानी के चलते हर कार्रवाई पारदर्शी और नियमसम्मत होना आवश्यक है, क्योंकि छोटी सी त्रुटि भी पूरे करियर को प्रभावित कर सकती है।
डीजीपी ने निष्पक्ष विवेचना, धैर्यपूर्वक सुनवाई और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रकरण में न फंसाया जाए।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस अकादमी निदेशक मोहम्मद शाहिद अबसार ने बताया कि दोनों बैचों का प्रशिक्षण चरणबद्ध रूप से संचालित हो रहा है, जिसमें कानून व्यवस्था, अपराध अनुसंधान, आईटी, साइबर अपराध सहित विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में शारीरिक दक्षता के लिए पीटी, ड्रिल, योग, फायरिंग और खेल गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। प्रशिक्षु अधिकारी उच्च शिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष हैं, जिनमें कई प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षित युवा शामिल हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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