बेंगलुरु , जून 18 -- कर्नाटक में निष्कासित भाजपा विधायक बसनागौड़ा पाटिल यत्नाल ने गुरुवार को विधान परिषद चुनाव में अपने रुख को लेकर चल रही अटकलों को खारिज करने का प्रयास किया।

श्री यत्नाल ने स्पष्ट किया कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को वोट देने के लिए प्रतिबद्ध हैं क्योंकि वे पार्टी के चिन्ह पर चुने गए थे और वे "न तो असंतुष्ट हैं और न ही बागी"।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक संदेश में श्री यत्नाल ने कहा कि उन्होंने परिषद चुनाव से पहले अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुये भाजपा के कर्नाटक प्रभारी नितिन नबीन को एक औपचारिक पत्र लिखा है।

श्री यत्नाल ने कहा, "मैंने आगामी कर्नाटक विधान परिषद चुनावों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए भाजपा नेता श्री नितिन नबीन जी को एक पत्र लिखा है। मैं किसी भी तरह से न तो असंतुष्ट हूं और न ही बागी। मैं उसी पार्टी को वोट दूंगा जिससे मुझे विजयपुरा की जनता ने चुना है।"विजयपुरा के विधायक ने कहा कि उनका यह निर्णय राजनीतिक नैतिकता से प्रेरित है, न कि पार्टी के भीतर फिर से जगह पाने का प्रयास है।

उन्होंने कहा, "मैं भाजपा को वोट देने के लिए नैतिक रूप से बाध्य हूं क्योंकि मैं उनके चुनाव चिन्ह पर चुना गया हूं। भाजपा के लिए मेरा वोट वर्तमान में 'वापसी' करने का कोई कदम नहीं है।"श्री यत्नाल का यह स्पष्टीकरण विधान परिषद चुनाव में विधायकों के मतदान के तौर-तरीकों को लेकर बढ़ी राजनीतिक उत्सुकता के बीच आया है। उन्हें इस वर्ष की शुरुआत में भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था।

भाजपा की केंद्रीय अनुशासन समिति ने मार्च में श्री यत्नाल को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। समिति ने इसके लिए पिछली चेतावनियों और व्यवहार में सुधार के आश्वासनों के बावजूद पार्टी अनुशासन के बार-बार उल्लंघन का हवाला दिया था।

विधायक को भेजे गए अपने संदेश में समिति ने कहा था कि उसने उनके द्वारा अनुशासन के बार-बार किये गये उल्लंघन को गंभीरता से लिया है। इस वजह से उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्हें पार्टी के उन सभी पदों से भी हटा दिया गया था, जिन पर वे तब रहे होंगे।

श्री यत्नाल अपने निष्कासन के बाद भी राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे। हाल ही में उन्हें कर्नाटक सरकार के उस निर्णय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, जिसमें छात्राओं को शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने की अनुमति दी गई थी। विजयपुरा में एक कॉलेज परिसर के पास भगवा शॉल बांटने का प्रयास करने के बाद उन्हें और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया गया था, जिससे इलाके में तनाव फैल गया था।

उनके इस नवीनतम बयान को परिषद चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह उनके निष्कासन और पार्टी नेतृत्व के कुछ धड़ों के साथ जारी मतभेदों के बावजूद भाजपा के लिए समर्थन का संकेत देता है।

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