सुलतानपुर , अक्टूबर 04 -- निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर-प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने आज यहां कहाकि जो पार्टी का झंडा उठाता है और समाज के सम्मान के लिए खड़ा होता है, वह उनका भाई है। निषाद समाज एकजुट होकर अपने सम्मान और अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करें।

निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल "निषाद पार्टी" के तत्वावधान में सुलतानपुर जिले के कूरेभार में 'संवैधानिक सुरक्षा अधिकार महासम्मेलन' के आयोजन में भीड़ को देखकर गदगद हुए निषाद समाज के नेता व कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहाकि हाथी, पंजा और साइकिल का बटन दबाएंगे तो नोट और नौकरी दोनों चली जाएगी। कुछ ऐसे अधिकारी हैं जो दिल से हाथी, साइकिल और पंजा के साथ हैं और ऊपर से कमल का मुखौटा लगाए हुए हैं। भगवान राम का एक ही उद्देश्य था निषाद को गले लगाना और रावण को खत्म करना। भाजपा के साथ गठबंधन आज भी है और कल भी रहेगा। राम मंदिर निर्माण का कार्य भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है। 7 साल में ही हम लोगों ने उत्तर प्रदेश में व्यापक परिवर्तन देखा है। पिछले कई वर्षों से सताए गए लोग आज 7 साल से सत्ता के साथ है और खुशहाल हैं। उत्तर-प्रदेश की यह पहली सरकार है जो निषाद आरक्षण के लिए पहल कर रही है। डबल मर्डर केस पर निषाद ने कहा कि पीड़िता को मदद दी जाएगी और आरोपी गिरफ्तार कर जेल भिजवाए जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी से हमने कहा है कि जो हारी हुई सीट हैं, उसे हमें दे दीजिए। जिन 16 सीट पर आप हारे हुए हैं, वहां हम रहेंगे। हम मांगने वाले नहीं हम देने वाले हैं।

गोरखपुर में निषाद समाज के लोगों के साथ कथित मारपीट और अभद्रता को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पार्टी हित और गठबंधन हित अपनी जगह हैं, लेकिन समाज के सम्मान और अधिकारों के लिए वह सबसे पहले खड़े होंगे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह निषाद समाज के लोगों को थप्पड़ मारे गए और गाली-गलौज की गई, वह केवल किसी व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि पूरे निषाद समाज का अपमान है।

डॉ. संजय निषाद ने कहा कि वीडियो देखने के बाद उन्होंने तत्काल राम नगीना साहनी को फोन करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने वर्षों तक पार्टी का झंडा उठाया और संघर्ष किया, उसके साथ इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, "यह थप्पड़ केवल राम नगीना साहनी के गाल पर नहीं पड़ा, बल्कि निषाद समाज के गाल पर पड़ा है। इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा और ऐसी सामंती मानसिकता रखने वालों को सबक सिखाया जाएगा।"उन्होंने कहा कि वह समाजवादी पार्टी अथवा भारतीय जनता पार्टी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन दोनों दलों में मौजूद निषाद नेताओं की चुप्पी पर सवाल जरूर उठाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दबाव की राजनीति के कारण कई नेता इस मामले में खुलकर सामने नहीं आए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने समाज के सम्मान के मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए।

डॉ. निषाद ने दावा किया कि घटना के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं से बातचीत की और स्पष्ट कहा कि यदि संबंधित नेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई नहीं हुई तो वह पार्टी कार्यालय और नेताओं के आवास का घेराव करेंगे। उनके मुताबिक इसके बाद कार्रवाई का आश्वासन मिला और एक वरिष्ठ समाजवादी नेता ने फोन कर धरना व घेराव रोकने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि यह निषाद समाज और निषाद पार्टी की एकजुटता की ताकत है। साथ ही उन्होंने निषाद पार्टी से जुड़े अन्य समाजों के लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि जो पार्टी का झंडा उठाता है और समाज के सम्मान के लिए खड़ा होता है, वह उनका भाई है। उन्होंने निषाद समाज से एकजुट होकर अपने सम्मान और अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।

इस आयोजन में जिले भर से निषाद समाज के लोग बसों में भर भर के पहुंचे थे।

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