वाराणसी , अप्रैल 08 -- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में कार्यरत सैकड़ों संविदा कर्मी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी बुधवार को अपनी मांगों को लेकर कुलपति से मिलने केंद्रीय कार्यालय पहुंचे।
कर्मचारियों का आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद 10 वर्ष से अधिक कार्य कर चुके कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन नई नियुक्तियां भी निकाल रहा है। उन्होंने कनिष्ठ लिपिक की प्रस्तावित परीक्षा के तत्काल स्थगन की मांग भी की है।
संविदा कर्मी कंचन लता राय ने कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुसार जिन कर्मचारियों ने 10 वर्ष से अधिक समय तक सेवा दी है, उनका नियमितीकरण किया जाना चाहिए, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक इस आदेश को लागू नहीं कर रहा है।
उन्होंने बताया कि यहां कई कर्मचारी ऐसे हैं जो 20-25 वर्षों से काम कर रहे हैं और कुछ तो संविदा कर्मी के रूप में ही रिटायर भी हो चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी तक नियमित नहीं किया गया है।
उनकी मुख्य मांग है कि सभी पात्र कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए। वे इस बात से भी नाराज हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां निकाल रहा है, जबकि सालों से उन पदों पर काम कर रहे अनुभवी कर्मचारियों को नियमित करने के बजाय नजरअंदाज किया जा रहा है। संविदाकर्मी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या 1200 से अधिक है।
कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से इस संबंध में बार-बार पत्र लिख रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। एक कमेटी भी गठित की गई थी, लेकिन उसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। कर्मचारी अपनी बात पहुंचाने के लिए शांतिपूर्वक वार्ता का रास्ता अपना रहे हैं और चाहते हैं कि कुलपति उनकी समस्याओं को सुनें तथा समाधान निकालें। अभी तक प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया है।
केंद्रीय कार्यालय में वित्तीय विभाग में कार्यरत संविदा कर्मी सौरभ सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी एवं संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के संदर्भ में पूर्व में कई बार पत्राचार किया जा चुका है। आज तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को लेकर सभी कर्मचारी इकट्ठा हुए हैं।
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