बारां , जुलाई 04 -- राजस्थान के बारां में नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) और अग्निशमन सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर नगर परिषद, अग्निशमन विभाग और संबंधितों कार्यालयों कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठने लगे हैं।

निजी संस्थानों और व्यावसायियों का आरोप है कि आगजनी से बचाव के उपकरण लगवाने के नाम पर उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है और भारी-भरकम राशि खर्च करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। व्यावसायियों का कहना है कि अग्निशमन सुरक्षा के नाम पर विशेष रूप से लाल रंग की पाइप लाइन और अन्य उपकरण अनिवार्य बताकर महंगे खर्च का बोझ डाला जा रहा है। उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का खेल चल रहा है, जिससे निजी क्षेत्र आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि यह नियम सभी के लिए समान हैं, तो जिले के कई सरकारी कार्यालयों, विभागों और सार्वजनिक भवनों में अब तक आवश्यक अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा व्यवस्थाएं क्यों नहीं हैं। जब सरकारी इमारतों में भी पर्याप्त अग्निशमन सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं, तो केवल निजी संस्थानों पर कार्रवाई और सख्ती क्यों की जा रही है।

व्यावसायियों का कहना है कि आग लगने की घटनाएं सरकारी और निजी भवनों में भेदभाव नहीं करतीं। ऐसे में प्रशासन वास्तव में लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो सबसे पहले सभी सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक भवनों में भी अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अग्नि सुरक्षा नियमों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पालन कराया जाए। किसी प्रकार की अनियमितता या मनमानी वसूली की शिकायतें हैं, तो उनकी स्वतंत्र जांच करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत हो और लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास भी बना रहे।

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