नयी दिल्ली , अगस्त 05 -- निजी क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशन बढ़ोतरी की मांग पर जोर देने के लिए पांच अगस्त को यहां जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।
ईपीएस, 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राऊत ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार ने बार-बार आश्वासन दिये जाने के बावजूद निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन बढ़ोतरी के बारे में कोई घोषणा नहीं की है। उन्होंने बताया कि एक जुलाई को समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की कोलकाता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि एक माह में अगर सरकार द्वारा पेंशन बढ़ोतरी की घोषणा तत्काल नहीं की जाती है तो पांच अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर ईपीएस- 95 पेंशनर प्रदर्शन करेंगे।
श्री राऊत ने कहा कि पेंशनरों को औसतन 1171 रुपये प्रति माह पेंशन दी जा रही है, जो पेंशन एक बार निर्धारित होती है उसमें आजीवन एक रुपये की भी वृद्धि नहीं होती है, जबकि महंगाई दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। पेंशनर दंपति को मुफ्त चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से 1000 रुपये न्यूनतम पेंशन की गारंटी है। इतनी कम राशि में जीवन निर्वाह कैसे किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बावजूद भी उच्च पेंशन लाभ से पेंशनर को वंचित किया जा रहा है। देश के 81 लाख पेंशनरों की न्यूनतम पेंशन 7500 रुपये एवं महंगाई भत्ता, पति-पत्नी को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान करने तथा उच्चतम न्यायालय के निर्णय अनुसार उच्च पेंशन लाभ के लिए पिछले 10 वर्षों से देश भर में सड़क से लेकर संसद तक शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रही है। लेकिन सरकार द्वारा बार-बार आश्वासन देने के बावजूद कोई घोषणा न किये जाने से पेंशनरों में आक्रोश व्याप्त है।
उन्होंने कहा कि पहले कोश्यारी समिति और अब संसद की स्थाई समिति भी पेंशन बढ़ोतरी की रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत कर चुकी है, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला जिससे पेंशनरों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द इस मामले में सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया गया तो केंद्रीय कार्यकारिणी कोलकाता की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार देश भर में कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालयों पर ताला बंदी/ जेल भरो, आमरण अनशन और अंत में विवश होकर सामूहिक आत्म दाह भी करना पड़ेगा।
श्री राऊत ने कहा कि देशभर में सभी पार्टियों के सांसदों मंत्रियों को पेंशनरों की आर्थिक बदहाली की जानकारी देते हुए कई बार ज्ञापन दिया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, श्रम मंत्री मनसुख मांडविया सहित सभी वरिष्ठ मंत्रियों से मिलकर इस समस्या का समाधान करने की अपील की जा चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकला है।
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