ईटानगर , अप्रैल 02 -- निचली सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना की चौथी इकाई (250 मेगावाट) की पानी के साथ जांच (वेट कमिशनिंग) की प्रक्रिया शुरू हो गयी है, जो 2000 मेगावाट की इस जलविद्युत परियोजना की चौथी इकाई को चालू करने की दिशा में एक अहम पड़ाव है।

इससे पहले इस परियोजना के कल-पुर्जों (मैकेनिकल रन) की सफलतापूर्वक जांच कर ली गयी है, जो इस बात का संकेत है कि परियोजना अब अपने निर्माण के चरण से निकलकर बिजली उत्पादन की ओर बढ़ रही है।

परियोजना की निर्माण करने वाली कंपनी एनएचपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) भूपेंद्र गुप्ता ने इस अवसर पर केंद्रीय विद्युत मंत्रालय, अरुणाचल प्रदेश और असम की सरकारों, एनएचपीसी के पूर्व अधिकारियों और पूरी सुबनसिरी प्रोजेक्ट टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

श्री गुप्ता ने इस सफलता को एनएचपीसी की बेहतरीन इंजीनियरिंग का प्रमाण बताया और कहा कि यह भारत के स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर ऊर्जा के सपने की ओर एक बड़ा कदम है। उन्होंने परियोजना प्रमुख राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व वाली टीम की सराहना की और शेष बची इकाइयों को भी समय पर चालू करने के लिए पूरी लगन से काम करने का आह्वान किया।

चौथी इकाई की टेस्टिंग शुरू होने के साथ ही इसे नेशनल ग्रिड से जोड़ने (सिंक्रोनाइज़ेशन) की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। 250 मेगावाट की अन्य चार इकाइयों को भी अलग-अलग चरणों में चालू किया जाएगा।पूरी तरह तैयार होने के बाद, यह 2000 मेगावाट (250 मेगावाट की आठ इकाइयाँ) की निचली सुबनसिरी परियोजना भारत की सबसे बड़ी 'रन-ऑफ-द-रिवर' जलविद्युत परियोजना बन जाएगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित