हेग , सितंबर 08 -- इजरायल को राजनीतिक, वित्तीय और सैन्य समर्थन देने से संबंधित मामले में जर्मनी ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी है। यह मामला निकारागुआ ने दायर किया है, जिसमें उसने जर्मनी पर गाजा में कथित नरसंहार के लिए इजरायल का समर्थन करने का आरोप लगाया है।
निकारागुआ द्वारा जर्मनी के खिलाफ दायर मामले पर सुनवाई सोमवार को द हेग स्थित पीस पैलेस में शुरू हुई। सुनवाई के पहले चरण में जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने न्यायालय के न्यायाधीशों के समक्ष प्रारंभिक आपत्तियां पेश कीं।
जर्मनी ने दलील दी कि मामले पर फैसला करने से पहले गाजा में इजरायल की कार्रवाइयों की वैधता तय करनी होगी। जर्मनी ने कहा कि मामले की कानूनी रूप से आगे सुनवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि इजरायल इस मामले में तीसरा पक्ष है और न तो कार्यवाही का पक्षकार है तथा न ही उसने इसमें शामिल होने के लिए सहमति दी है।
जर्मन विदेश मंत्रालय में कानूनी मामलों की महानिदेशक एवं कानूनी सलाहकार जूलिया मोनार ने जर्मनी की ओर से अदालत में पहली दलील पेश की। उन्होंने कहा कि जर्मनी को इजरायल को हथियारों की बिक्री को लेकर कई अनुरोध और आपराधिक शिकायतें मिली हैं।
सुश्री मोनार ने कहा कि कुछ आवेदनों की समीक्षा की गयी, जबकि अन्य को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे। उन्होंने कहा कि इजरायल के लिए जर्मनी का समर्थन अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन की उसकी प्रतिबद्धता से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "इजरायल राज्य के अस्तित्व और सुरक्षा के लिए हमारा अटूट समर्थन जर्मन-इजरायली संबंधों का मूल है, जो जर्मनी की स्थायी ऐतिहासिक जिम्मेदारी से उत्पन्न होता है।"उन्होंने तर्क दिया कि यह समर्थन अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं है। इसके प्रमाण के तौर पर उन्होंने फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) को जर्मनी के वित्तीय योगदान का उल्लेख किया और कहा कि इससे फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के प्रति जर्मनी के समर्थन का पता चलता है।
सुश्री मोनार ने यह भी कहा कि जर्मनी ने आठ अगस्त से 23 नवंबर 2025 के बीच गाजा में इस्तेमाल किये जा सकने वाले हथियारों के निर्यात लाइसेंस की मंजूरी निलंबित कर दी थी। उन्होंने कहा कि हथियारों के निर्यात लाइसेंस की प्रक्रिया 2025 के अंत में ही दोबारा शुरू हुई और यह निर्णय अक्टूबर 2025 में हुए संघर्ष विराम समझौते से सीधे जुड़ा था।
जर्मनी द्वारा 24 नवंबर, 2025 को निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाने के बाद, जर्मन रक्षा कंपनियों को इस साल जनवरी से जून के बीच इज़राइल को कुल 80 करोड़ पाउंड मूल्य के सैन्य उपकरण आपूर्ति करने के लिए लाइसेंस दिये गये।
उल्लेखनीय है कि निकारागुआ ने एक मार्च 2024 को आईसीजे में जर्मनी के खिलाफ मामला दायर किया था। उसने जर्मनी पर इजरायल को राजनीतिक, वित्तीय और सैन्य समर्थन देकर "नरसंहार के कृत्य को सुगम बनाने" का आरोप लगाया था। अप्रैल 2024 में हुई सुनवाई के दौरान निकारागुआ ने कहा था कि जर्मनी इजरायल को हथियारों की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है और वह इस बात से अनजान नहीं हो सकता था कि इन हथियारों का इस्तेमाल गाजा में कथित नरसंहार में किया जा रहा है।
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