जयपुर , सितम्बर 14 -- राजस्थान में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नगर निकाय चुनावों के परिणामों को भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) की सरकार को आईना दिखाने वाले करार देते हुए कहा है कि इन चुनावों में हमेशा से भाजपा को बढ़त लेने वाला माना जाता है और सरकार होने के कारण भी लाभ की स्थिति शासन करने वालों की मानी जाती है लेकिन इस चुनाव में भाजपा की कांग्रेस पर बढ़त एक प्रतिशत से भी कम रह गई है।

श्री डोटासरा ने चुनाव परिणाम के बाद यहां प्रेस वार्ता में कहा कि वर्ष 2014-2016 में प्रदेश में भाजपा की वसुंधरा सरकार थी तो वोट शेयर में भाजपा की बढ़त 8.12 प्रतिशत थी, 2019-2021 के मध्य कांग्रेस की गहलोत सरकार के समय कांग्रेस की भाजपा पर बढ़त 2.2 प्रतिशत थी, किन्तु इस चुनाव में परिणामों से परिलक्षित हुआ है कि भाजपा की कांग्रेस पर बढ़त एक प्रतिशत से भी कम रह गई है, जबकि स्थानीय निकाय के चुनाव में लोगों को सरकार से आशा होती है कि काम कराने में आसानी रहेगी, किन्तु इन चुनावों में भाजपा को जनता ने नकारा है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस को मिले वोटों की गणना अगर भाजपा द्वारा बेईमानीपूर्वक किये गये परिसीमन को अलग रखकर देखी जाये तो कांग्रेस पार्टी भाजपा के मुकाबले 1500 वार्ड अधिक जीतकर आती। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों में इन 188 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का वोट शेयर 42.41 प्रतिशत था जो लोकसभा में बढक़र 50.14 हो गया, किन्तु इन चुनावों में भाजपा सरकार के कुशासन के कारण वोट प्रतिशत गिरकर 35.3 प्रतिशत रह गया, इससे बड़ा गिरावट का उदाहरण देश में आज तक नहीं देखा गया है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भाजपा का दलित समाज के प्रति विरोधी रवैया रहा है उसका परिणाम है कि अनुसूचित जाति आरक्षित वार्डों में कांग्रेेस ने 542 वार्ड जीते हैं जबकि भाजपा ने मात्र 350 वार्ड पर ही जीत दर्ज की है, इस प्रकार कांग्रेस की बढ़त इन आरक्षित वार्डों में 192 की रही। एससी महिला आरक्षित वार्ड में कांग्रेस ने 261 वार्ड जीते हैं जबकि भाजपा मात्र 186 ही जीत सकी, इसमें कांग्रेस की 75 सीटों की बढ़त है। एसटी महिला आरक्षित वार्ड में कांग्रेस ने 53 वार्ड जीते हैं जबकि भाजपा मात्र 39 ही जीत सकी है।

श्री डोटासरा ने कहा कि भाजपा की सरकार ने बेतरतीब और नियम विरूद्ध परिसीमन किया, कहीं चार हजार का वार्ड है तो कहीं 35 हजार मतदाताओं का वार्ड है, छोटे निकायों मेें कहीं 600 का वार्ड है तो वहां 3000 का भी वार्ड है, इस कारण 4097 भाजपा द्वारा जीते गये वार्ड में 1316 वार्डों में जीत का अंतर 100 वोटों से भी कम है, 772 वार्डों में भाजपा की जीत का अंतर 50 से कम वोटों से है। इसी प्रकार 13 वार्डों में भाजपा एक वोट से जीत दर्ज कर सकी है।

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