जयपुर , मई 17 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने नारी गरिमा एवं संस्कार को सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति समाज की सामूहिक आस्था का प्रतीक बताते हुए कहा है कि नारी शक्ति और संस्कार, भारत की वास्तविक शक्ति है।
श्री देवनानी रविवार को यहां कांस्टीट्यूशन क्लब आफ राजस्थान में राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के एल शर्मा द्वारा संकलित पुस्तक 'गीता शर्मा एक असाधारण व्यक्तित्व' विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर श्री देवनानी ने छह ग्रामीण बालिकाओं को छात्रवृत्ति प्रदान की।
उन्होंने कहा कि भारत ने हजारों वर्ष पूर्व ही महिलाओं को शिक्षा, विचार और आध्यात्मिक स्वतंत्रता प्रदान कर दी थी। वैदिक काल में गार्गी, मैत्रेयी जैसी विदुषियों ने केवल ज्ञान अर्जित नहीं किया बल्कि समाज का मार्गदर्शन भी किया। भारतीय परंपरा में नारी को सदैव ज्ञान और चेतना की केंद्र शक्ति माना गया है।
श्री देवनानी ने कहा कि आज स्वतंत्र भारत पुनः उसी वैदिक चेतना को जागृत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला विकास से आगे बढ़कर महिला नेतृत्व आधारित विकास की अवधारणा को स्थापित किया गया है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, मुद्रा योजना और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों ने महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सहभागी और नेतृत्वकर्ता बनाया है।
उन्होंने कहा कि आज भारत की बेटियाँ सेना, अंतरिक्ष विज्ञान, प्रशासन, खेल और उद्यमिता सहित प्रत्येक क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं। यह परिवर्तन केवल योजनाओं का परिणाम नहीं, बल्कि भारतीय समाज की चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है।
श्री देवनानी ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी संस्कृति, अध्यात्म, पारिवारिक व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं में निहित है। यही कारण है कि आज पूरा विश्व योग, आयुर्वेद और भारतीय जीवन दर्शन की ओर आकर्षित हो रहा है।
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