देहरादून , अप्रैल 19 -- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ संसद में विपक्ष की वोटिंग को देश की आधी आबादी के खिलाफ अन्याय बताया है।
उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास और मंशा हमेशा महिला विरोधी रही है और जो उन्होंने इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर संसद में किया, उसका जवाब देश जनता वोट के अधिकार से देगी।
रविवार को देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला अधिकारों की लड़ाई में बाधा को जीत बताना, विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिस तरह मातृ शक्ति के सामर्थ्य से यह दशक उत्तराखंड का बन रहा है, ठीक ऐसे ही महिला अधिकार के इस विकल्परहित संकल्प को भाजपा अवश्य साकार करके रहेगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार, संसद में "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" के भारतीय दर्शन को आत्मसात करते हुए, संसद तथा विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को मंजूरी प्रदान करने लिए तीन बिल प्रस्तुत किए गए थे। लेकिन कांग्रेस और पूरा विपक्ष माताओं बहनों के हक को देने में सबसे बड़ी बाधा बने। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 'सबका साथ, सबका विकास' के मूल मंत्र पर चलते हुए, आधी आबादी को उनका पूरा हक प्रदान करने का प्रयास किया ताकि मातृशक्ति विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे सके।
मुख्यमंत्री ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह विधेयक के सदन में गिरने पर कांग्रेस समेत विपक्ष द्वारा जश्न मनाया गया, वह बेहद शर्मनाक था। नारी अधिकारियों की लड़ाई में बाधा उत्पन कर, उसे जीत दर्शाने से विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता उजागर हुई है। उन्होंने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में हुई चर्चा केवल कुछ विधेयकों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में समान भागीदारी देने का एक महत्वपूर्ण अवसर था। जो हमारी माताओं, बहनों और बेटियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता था। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने इस ऐतिहासिक अवसर का भी विरोध किया।
श्री धामी ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता दी और देशहित से ऊपर दलगत सोच को रखा। उन्होंने कहा कि इन दलों का विरोध केवल संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे यह स्पष्ट संकेत गया कि महिलाओं के अधिकारों के प्रश्न पर भी वे गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने तकनीकी आपत्तियों और प्रक्रियात्मक बहानों के माध्यम से इस प्रक्रिया को बाधित किया। झूठे तर्कों और भ्रम फैलाकर उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक विवाद का रूप देने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिसीमन को लेकर विपक्ष द्वारा जो आशंकाएं व्यक्त की गईं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। जबकि परिसीमन एक संवैधानिक दायित्व है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या के अनुरूप संतुलित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित व्यवस्था में सभी राज्यों के लिए समान अनुपात में सीटों की वृद्धि का प्रावधान था। इससे किसी भी राज्य, विशेषकर दक्षिण भारत, के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने समाजवादी पार्टी द्वारा धर्म आधारित आरक्षण की मांग को न केवल असंवैधानिक बल्कि यह मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया।
श्री धामी ने महिला अधिकारों के मुद्दों पर कांग्रेस का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अत्यंत खराब बताया।
उन्होंने कहा कि दशकों तक महिला आरक्षण विधेयक को लंबित रखना उनके राजनीतिक दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। शाहबानो प्रकरण में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के विरुद्ध खड़ा होना और तीन तलाक समाप्त करने के प्रयासों का विरोध करना भी उसी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यही नहीं, कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निर्णयों और विधेयकों का भी हमेशा विरोध किया है। इनमें तीन तलाक उन्मूलन कानून, नागरिकता संशोधन अधिनियम, अनुच्छेद 370 से संबंधित निर्णय और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधार शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक निर्णयों पर भी इन दलों द्वारा बार-बार प्रश्न उठाए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि उनका विरोध प्रायः नीतिगत कम और राजनीतिक अधिक होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश की महिलाएं पंचायत से लेकर विभिन्न स्तरों पर नेतृत्व कर रही हैं और अपनी क्षमता का सफल प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण सहित यहाँ के पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में मातृ शक्ति का योगदान अतुलनीय है। पूरे तन्त्र को चलाने में वो धुरी की तरह हैं। उन्होंने कहा कि अगर यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हो जाता तो मातृ शक्ति को राजनीतिक रूप से सशक्त और नीति निर्माण में उनकी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित होती।
उन्होंने विश्वास दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के सशक्तिकरण और संतुलित प्रतिनिधित्व के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। यह विषय किसी एक दल का नहीं, बल्कि देश के भविष्य, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मजबूती से जुड़ा हुआ है।
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