जयपुर , अक्टूबर 05 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने नगरपालिका चुनाव में नामांकन पत्र खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद उम्मीदवार को सीधे रिट याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बजाय निर्धारित चुनाव याचिका के माध्यम से विवाद उठाना होगा।

न्यायालय ने कहा कि चुनाव से जुड़े विवादों के निस्तारण के लिए कानून में विशेष प्रक्रिया निर्धारित है। नामांकन पत्र की स्वीकृति या अस्वीकृति भी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे मामलों में संवैधानिक न्यायालय को सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय संबंधित चुनाव कानून में उपलब्ध वैधानिक उपाय का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने नगरपालिका चुनाव के लिए दाखिल अपने नामांकन पत्र को खारिज किए जाने को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय से राहत मांगी थी। याचिकाकर्ता की ओर से नामांकन खारिज करने की कार्रवाई को चुनौती देते हुए चुनाव लड़ने का अवसर दिए जाने की मांग की गई थी।

उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान चुनावी प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं पर जोर दिया। न्यायालय ने माना कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन से संबंधित विवादों के लिए कानून में चुनाव याचिका का प्रभावी वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है। इसलिए रिट याचिका के जरिए इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।

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