चंडीगढ़ , सितंबर 12 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने शनिवार को नाभा नगर परिषद की हालिया बैठक से जुड़े एक वीडियो का हवाला देते हुए निर्वाचित महिला पार्षदों की भागीदारी और बैठक में गैर-निर्वाचित व्यक्तियों की मौजूदगी पर सवाल उठाये तथा मामले की निष्पक्ष जांच कर आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।

श्री कैंथ ने कहा कि वीडियो में सत्तारूढ़ पक्ष की निर्वाचित महिला पार्षद नजर नहीं आ रही हैं, जबकि कुछ गैर-निर्वाचित व्यक्ति बैठक में दिखायी दे रहे हैं। उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि केवल वीडियो के आधार पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए और वास्तविक स्थिति की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि निर्वाचित महिला पार्षद बैठक में मौजूद थीं या नहीं, उन्हें नियमों के अनुसार बैठक की सूचना और भागीदारी का उचित अवसर दिया गया था या नहीं तथा वीडियो में नजर आ रहे गैर-निर्वाचित व्यक्ति किस अधिकार या हैसियत से बैठक में मौजूद थे।

उन्होंने बैठक का उपस्थिति रजिस्टर, नोटिस, एजेंडा, कार्यवाही विवरण, कोरम रिकॉर्ड और पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नाभा के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों की बैठक में क्या भूमिका रही और कार्यवाही किन नियमों के तहत संचालित हुई।

भाजपा नेता ने हलका विधायक गुरदेव सिंह देव मान, नगर परिषद अध्यक्ष और कार्यकारी अधिकारी से निर्वाचित महिला पार्षदों की उपस्थिति एवं भागीदारी तथा गैर-निर्वाचित व्यक्तियों को बैठक में शामिल होने की अनुमति के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

श्री कैंथ ने आरोप लगाया कि महिलाओं के सशक्तिकरण की बात केवल नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और स्थानीय निकायों में चुनी गयी महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान तथा सम्मानजनक भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को जानबूझकर निर्णय प्रक्रिया से दूर रखने या उनके अधिकारों की अनदेखी किये जाने की बात सामने आती है तो संबंधित राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड और पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच में यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो मामला एडीसी पटियाला, स्थानीय निकाय विभाग पंजाब के निदेशक, पंजाब के मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जायेगा।

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