केंद्रापाड़ा , अगस्त 11 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ओडिशा के गंजम जिले में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म की शिकायत पर कार्रवाई में कथित देरी का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी को अगले महीने आयोग के सामने पेश होने के लिए समन जारी किया है।

आयोग ने मंगलवार को केंद्रपाड़ा के मानवाधिकार कार्यकर्ता सागर जेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका के अनुसार, गंजम जिले में एक रिश्तेदार द्वारा एक नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और पीड़िता के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी।

आयोग ने 20 फरवरी को सुनवाई के दौरान शिकायत की एक प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए गंजम के जिलाधिकारी को ऑनलाइन भेजने के साथ ही चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पेश करने के निर्देश दिये थे।

आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई जवाब या रिपोर्ट नहीं मिली है और पांच महीने से अधिक समय बीत चुका है। देरी को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने अपनी रजिस्ट्री को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत गंजम के जिलाधिकारी को सशर्त समन जारी करने का निर्देश दिया है। इसके तहत जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) के साथ 11 सितंबर को सुबह 11 बजे आयोग के समक्ष उपस्थित होना होगा।

आयोग ने कहा कि यदि निर्धारित सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले एटीआर प्राप्त हो जाती है, तो जिला मजिस्ट्रेट की व्यक्तिगत उपस्थिति को माफ कर दिया जायेगा।

इसमें आगे चेतावनी दी गयी कि बिना किसी कानूनी बहाने के समन का पालन करने में विफलता पर सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश के तहत गैर-उपस्थिति के लिए निर्धारित परिणाम भुगतने होंगे, जिसमें वारंट जारी होने की संभावना भी शामिल है।

कार्रवाई की एक प्रति सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव को भी भेज दी गयी है।

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