नैनीताल , जुलाई 18 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार जिले के मंगलौर थाना में दर्ज एक मामले में नाबालिग याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली तारीख तक याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाए। साथ अदालत ने याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ में एक नाबालिग की ओर से दायर याचिका पर विगत 14 अगस्त को सुनवाई की।
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 226 का हवाला देते हुए विगत एक अगस्त को दर्ज मामले को निरस्त करने की मांग की थी। इस मामले में आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता नाबालिग और निर्दोष हैं तथा उन्हें झूठा फंसाया गया है। दलील में यह भी कहा गया कि हाल में हुए स्थानीय चुनावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक एवं व्यक्तिगत मतभेद उत्पन्न हुए थे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से आगे आरोप लगाया गया कि इसी समझौते के लिए दबाव बना रहे थे और समझौता नहीं होने पर दबाव के चलते उनके खिलाफ झूठे एवं बढ़ा-चढ़ाकर आरोप लगाए गए। यह भी दलील दी गई कि कथित घटना में याचिकाकर्ताओं ने न तो शिकायतकर्ता पक्ष पर हमला किया और न ही किसी सदस्य को चोट पहुंचाई।
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