चंडीगढ़ , फरवरी 20 -- पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा शुक्रवार को आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी के दौरान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पंजाब राज्य का स्टेट फोकस पेपर जारी किया गया।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्राथमिकता क्षेत्र में 3.09 लाख करोड़ रुपये की ऋण क्षमता का आकलन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.37 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। कुल संभावित ऋण में से 1.25 लाख करोड़ रुपये कृषि क्षेत्र के लिए तथा 43 प्रतिशत एमएसएमई क्षेत्र के लिए अनुमानित किया गया है। वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि नाबार्ड ने राज्य सरकार के साथ मिलकर पंजाब की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पंजाब को देश का 'अन्न भंडार' बताते हुए फसल विविधीकरण और भूजल स्तर में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया तथा राज्य सरकार की 'हर खेत तक पानी' की परिकल्पना साझा की। उन्होंने एमएसएमई, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया तथा किसानों तक ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने में नाबार्ड की भूमिका की सराहना की। साथ ही, उन्होंने संगोष्ठी में जारी स्टेट फोकस पेपर 2026-27 और आधारभूत संरचना पर कॉफी टेबल पुस्तिका की प्रशंसा की।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक बी. रमेश बाबू ने जिला स्तर पर तैयार किये जाने वाले ऋण संभाविता युक्त योजना की प्रक्रिया तथा उसके राज्य स्तर पर स्टेट फोकस पेपर के रूप में समेकन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अर्थव्यवस्था के सबसे छोटे घटक तक संस्थागत वित्तीय सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा कृषि एवं समग्र अर्थव्यवस्था में पंजाब की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बैंकों एवं अन्य हितधारकों से मृदा लवणता, क्षारीयता और भूजल दोहन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए किसानों को सहयोग प्रदान करने तथा कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में जमीनी स्तर पर ऋण प्रवाह बढ़ाने का आह्वान किया।
भारतीय रिज़र्व बैंक के महाप्रबंधक पंकज सेतिया ने नाबार्ड को संगोष्ठी के आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए इसे बैंकों के लिए मार्गदर्शक और राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण ऋण रोडमैप बताया।
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