नागपुर , अगस्त 26 -- महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता नाना पटोले ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संगठनात्मक ढांचे, फंडिंग के स्रोतों और विदेशी गतिविधियों पर सवाल उठाये।
श्री पटोले ने अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आयोजित आरएसएस से जुड़े एक कार्यक्रम का वहां के मेयर जोहरान ममदानी के विरोध किये जाने के बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदा अमेरिका यात्रा की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र या देश में कहीं भी औपचारिक रूप से पंजीकृत न होने के बावजूद आरएसएस विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के माध्यम से देशभर में काम करता है। उन्होंने दावा किया कि संगठन के कई देशों में बैंक खाते हैं और इसके वित्तपोषण व गतिविधियों में अधिक पारदर्शिता की मांग की।
श्री पटोले ने तर्क दिया कि आरएसएस के फंड के स्रोतों और उनके उपयोग की गहन जांच की जानी चाहिए। अमेरिका में संगठन की हो रही आलोचना का जिक्र करते हुए उन्होंने न्यूयॉर्क में प्रस्तावित आरएसएस के कार्यक्रम पर आपत्तियां जताये जाने के बावजूद श्री भागवत की अमेरिका यात्रा के औचित्य पर सवाल उठाया।
श्री पटोले ने कहा, "मैं लगातार यह कहता रहा हूं कि जो संगठन न तो महाराष्ट्र में पंजीकृत है और न ही देश में कहीं और, वह एनजीओ के जरिये देशभर में काम कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक 36 देशों में इसके बैंक खाते हैं, फिर भी इस बात की कोई स्पष्टता नहीं है कि यह पैसा कहां से आता है और इसे कैसे खर्च किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संगठन पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे यह एक ऐसा मुद्दा बन जाता है, जिसकी जांच जरूरी है।"इस बीच न्यूयॉर्क शहर के मेयर ममदानी ने कहा कि वह शहर में आयोजित आरएसएस से जुड़े कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते हैं, हालांकि उन्होंने इस बात पर अनिश्चितता जतायी कि क्या नगर निगम अधिकारियों के पास किसी निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रोकने का कानूनी अधिकार है। उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, "मैं इस रैली का समर्थन नहीं करता, लेकिन मुझे नहीं पता कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर के प्रशासन के पास है या नहीं।"अपनी भारतीय-अमेरिकी पृष्ठभूमि के बारे में बात करते हुए श्री ममदानी ने कहा कि भारत को लेकर उनकी समझ बहुलवाद और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों में निहित है। उन्होंने कहा, "मैं अपने शहर के इतिहास में पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर के रूप में यहां खड़ा हूं। मेरा अधिकतर परिवार अब भी भारत में रहता है। जिस भारत के बारे में जानते हुए मैं बड़ा हुआ हूं, वह एक बहुलवादी और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य था, जहां पृष्ठभूमि की परवाह किये बिना हर व्यक्ति में अपनापन था।"श्री ममदानी ने भेदभावपूर्ण राजनीतिक आंदोलनों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह ऐसी किसी भी विचारधारा का विरोध करते हैं जो समावेशिता और समान अधिकार की भावना को कमजोर करती है।
उनकी यह टिप्पणी संघ प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क पहुंचने के एक दिन बाद आयी है। श्री भागवत तीन देशों की यात्रा के पहले चरण के तहत यहां पहुंचे हैं, जहां से वे कनाडा और ब्रिटेन भी जायेंगे। वह 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स' में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित कर सकते हैं। यह कार्यक्रम आरएसएस के शताब्दी वर्ष के जनसंपर्क अभियानों का हिस्सा है।
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