बेंगलुरु , अगस्त 30 -- कर्नाटक कैबिनेट से बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद दो खाली पड़े मंत्री पदों को भरने का राजनीतिक गणित एक बार फिर गरमा गया है।

वाल्मीकि निगम मामले पर विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच सत्तारूढ़ कांग्रेस अब जातीय, क्षेत्रीय और लैंगिक समीकरण साधने में जुटी है।

कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से धन के अवैध हस्तांतरण विवाद के बीच श्री नागेंद्र ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। उनके बाहर होने से अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रतिनिधित्व के लिए एक नया पद खाली हो गया है, जिससे मंत्रिमंडल में फेरबदल की तैयारी कर रहे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने एक अड़चन कम हुई है।

मंत्रिमंडल में दो पद खाली होने के बाद पार्टी के भीतर मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर चर्चा केंद्रित है- महिला प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और अनुसूचित जनजाति समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व बनाये रखने की मांग।

चर्चाओं में विशेष रूप से बल्लारी के प्रतिनिधित्व के संदर्भ में अन्नपूर्णा तुकाराम का नाम सामने आया है, हालांकि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर स्थानीय कांग्रेस नेताओं के बीच मतभेद की सूचना हैं। इसके अलावा महिला कोटे के तहत मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर के नाम पर भी विचार किया जा रहा है।

एक अन्य फॉर्मूले पर चर्चा श्री बसवराज शिवन्ना को शामिल करने की है, जिससे कांग्रेस के भीतर प्रतिस्पर्धी राजनीतिक समीकरणों को साधने में मदद मिल सकती है। वहीं, माना जा रहा है कि विधायक एम कृष्णप्पा मंत्रिमंडल विस्तार से बाहर रखे जाने को लेकर नाराज हैं।

श्री नागेंद्र के इस्तीफे के बाद किसी एसटी प्रतिनिधि को मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग ने और जोर पकड़ लिया है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि खाली हुआ पद इसी समुदाय के व्यक्ति से भरा जाना चाहिए।

मंत्रिमंडल का यह पुनर्गठन शिवकुमार सरकार के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील समय पर हो रहा है। भाजपा ने वाल्मीकि निगम विवाद पर 'पदयात्रा' का एलान किया है, जिससे श्री नागेंद्र के इस्तीफे के बावजूद इस मुद्दे के राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहने के आसार हैं।

मुख्यमंत्री के सामने तात्कालिक चुनौती विपक्ष के अभियान को बेअसर करने के साथ-साथ कांग्रेस के भीतर जारी विभिन्न जातिगत, क्षेत्रगत और व्यक्तिगत दावों के बीच संतुलन बिठाने की है।

वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों पर केंद्रित राजनीतिक गणित के बीच, इन दो खाली पदों को भरना कांग्रेस के आंतरिक संतुलन की एक महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जा रही है।

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