बेंगलुरु , अगस्त 22 -- हाल ही में विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन के कारण कर्नाटक का विधानसभा का सत्र सात दिनों तक बाधित रहा। अब मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफ़े की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल एस (जेडीएस) अपनी आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक करने जा रहे हैं।

विपक्षी दलों ने वाल्मीकि कॉर्पोरेशन में कथित अनियमितताओं को लेकर नागेंद्र के इस्तीफ़े की मांग करते हुए सोमवार से शुक्रवार तक दोनों सदनों के अंदर और बाहर संयुक्त रूप से विरोध-प्रदर्शन किया था। उनका कहना है कि जब तक मंत्री पद नहीं छोड़ते, वे सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे।

हालांकि, सरकार ने अब तक नागेंद्र का इस्तीफ़ा लेने का कोई संकेत नहीं दिया है। सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू होने वाली है, ऐसे में भाजपा और जेडीएस के नेताओं के साथ केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी की शनिवार या रविवार को बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें वे अपने आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा तैयार करेंगे।

राजग नेताओं के इस बात पर विचार करने की संभावना है कि अगर नागेंद्र इस्तीफ़ा नहीं देते हैं तो क्या वे विधानसभा में विरोध जारी रखें या अपना ध्यान एनआईसीई रोड टोल और किसानों की चिंताओं जैसे अन्य मुद्दों पर केंद्रित करें।

दोनों पार्टियों ने पहले भी संयुक्त प्रदर्शन किया था, जिसमें उनके विधायकों ने काली शर्ट पहनकर विधान सौधा तक मार्च किया था। जेडीएस विधायक करेम्मा नायक ने कैबिनेट में नागेंद्र को बनाए रखने के सरकार के फ़ैसले की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि कथित अनियमितताओं ने वाल्मीकि समुदाय के लिए बनी योजनाओं पर बुरा असर डाला है।

सोमवार को जब विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू होगी, तो नागेंद्र के इस्तीफ़े को लेकर सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्ष के बीच राजनीतिक गतिरोध जारी रहने की उम्मीद है।

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