नयी दिल्ली , मार्च 06 -- उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नागालैंड को प्रकृति, संस्कृति और साहस का संगम बताते हुए कहा है कि राज्य की वास्तविक शक्ति यहां के लोगों और उनकी जीवंत परंपराओं में निहित है।
श्री राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नागालैंड के लुमामी परिसर में आयोजित नागालैंड विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में नागालैंड आने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने नागालैंड को प्रकृति, संस्कृति और साहस का संगम बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की वास्तविक शक्ति यहां के लोगों और उनकी जीवंत परंपराओं में निहित है। भारत की विविधता में एकता पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की शक्ति उसके मतभेदों में नहीं, बल्कि उसके लोगों को एकजुट करने वाली एकता में है।
उन्होंने 1994 में नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी से अलग होकर स्थापित नागालैंड विश्वविद्यालय द्वारा उच्च शिक्षा में किए गए महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने अपने शैक्षणिक दायरे का विस्तार किया है और पूरे क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच को मजबूत किया है। उन्होंने कैंसर अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना सहित विभिन्न क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और स्वदेशी नगा भाषाओं और पारंपरिक कानूनों के संरक्षण और दस्तावेजीकरण के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
उपराष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए उनसे विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच सामंजस्य बनाए रखते हुए उद्देश्यपूर्ण प्रगति के लिए प्रयास करने का आग्रह किया। युवाओं को जिम्मेदार जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने छात्रों से एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण को लेकर प्रतिबद्ध रहने और नशे को दृढ़ता से ना कहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि दुनिया पहले से कहीं अधिक तेजी से विकसित हो रही है। उन्होंने उभरती चुनौतियों और अवसरों के अनुकूल होने के लिए ज्ञान और कौशल को लगातार उन्नत करने के महत्व पर जोर दिया।
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