नागपुर , अप्रैल 16 -- महाराष्ट्र के राष्ट्रसंत टुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा नया उपकरण विकसित किया है, जो व्यक्ति की सांस के माध्यम से रक्त शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर की निगरानी कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, यह पारंपरिक तरीकों के बजाय, रक्त में शर्करा के स्तर को मापने के लिये ऐसा विकल्प उपलब्ध कराता है, जिसमें शरीर में सुई चुभाकर खून निकालने की जरूरत नहीं पड़ती।
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रसंत टुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने एक अभिनव उपकरण विकसित किया है जो सांस के माध्यम से रक्त शर्करा के स्तर को मापता है। इस उपकरण से रक्त शर्करा मापने के लिये सुई का उपयोग नहीं करना पड़ता और इसका इस्तेमाल मधुमेह की पहचान के लिये पारंपरिक रक्त परीक्षणों के विकल्प के रूप में किया जा सकता है।
यह उपकरण छोड़ी गयी सांस में मौजूद एसीटोन के स्तर का विश्लेषण करके काम करता है। चूंकि रक्त शर्करा का स्तर बढ़ने के साथ एसीटोन की मात्रा भी बढ़ती है, इसलिये शोधकर्ताओं ने पूर्वानुमान मॉडल का उपयोग करके सांस के एसीटोन और रक्त शर्करा के बीच एक संबंध स्थापित किया है। यह नवाचार सुई-आधारित रक्त परीक्षणों की आवश्यकता को समाप्त करता है, जिससे शर्करा की निगरानी दर्द रहित और अधिक सुविधाजनक हो जाती है, विशेष रूप से उन मधुमेह रोगियों के लिये जिन्हें बार-बार परीक्षण की आवश्यकता होती है।
इस शोध को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, जिसमें 'गैर-इनवेसिव मधुमेह निगरानी उपकरण' के लिये यूनाइटेड किंगडम का डिजाइन पंजीकरण प्रमाणपत्र भी शामिल है। यह परियोजना नागपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान विभाग द्वारा संचालित की गयी थी।
इसमें मुख्य योगदान देने वालों में डॉ. वर्षा धुर्वे के साथ शोधकर्ता हर्ष तिवारी और सबरीन बानो मोहम्मद जावेद मंसूरी शामिल थे। यह अध्ययन नागपुर और अमरावती के महाविद्यालयों के साथ-साथ ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन सहित कई संस्थानों के सहयोग से किया गया था।
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