चंडीगढ़ , सितंबर 22 -- चंडीगढ़ प्रशासन ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अभियान तेज करते हुए रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक सहयोग पर विशेष जोर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग की ओर से मंगलवार को नशा मुक्त भारत अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़ ने कहा कि नशे की लत केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि परिवार और पूरे समाज को प्रभावित करती है।
श्री बराड़ के अनुसार, अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच चंडीगढ़ की नशा मुक्ति एवं उपचार सुविधाओं में 76,615 बाह्य रोगी परामर्श दर्ज किए गए। इनमें 6,774 नए पंजीकरण और 69,641 अनुवर्ती परामर्श शामिल हैं। इस अवधि में 1,131 लोगों ने भर्ती होकर उपचार लिया। उन्होंने बताया कि पिछले 10 दिनों में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में 118 प्राथमिकी दर्ज कर 120 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दवा विक्रेताओं की भी जांच जारी है और नशे के लिए दुरुपयोग की आशंका वाली बिना हिसाब की दवाएं जब्त की गई हैं।
श्री बराड़ ने कहा कि उपचार व्यक्ति को नशे से बाहर निकलने में मदद करता है, जबकि रोकथाम युवाओं को इसकी शुरुआत से ही दूर रख सकती है। उन्होंने नशे से जूझ रहे लोगों के प्रति कलंक के बजाय सहयोग और सम्मान का माहौल बनाने की अपील की।
कार्यक्रम में प्रोफेसर और विश्वविद्यालय कर्मी ईशु शुक्ला ने अपनी पुनर्वास यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि कम उम्र में दोस्तों के प्रभाव में नशे की शुरुआत हुई, जिसका असर पढ़ाई, परिवार और सामाजिक जीवन पर पड़ा। बाद में उन्होंने एसपीवाईएम में तीन महीने उपचार लिया और तीन महीने स्वयंसेवक के रूप में काम किया। अब उन्हें नशा छोड़े लगभग दो वर्ष होने वाले हैं। उन्होंने परिवारों से नशे की लत से जूझ रहे लोगों को तानों के बजाय प्यार और सहयोग देने की अपील की।
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि नशे का दुरुपयोग परिवार, समाज और देश को कमजोर करता है। उन्होंने बताया कि 30 सितंबर से नशे के खिलाफ घर-घर सर्वेक्षण और जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने लोगों से नशा तस्करों की जानकारी प्रशासन के साथ साझा करने की अपील की।
श्री कटारिया ने कहा कि पुनर्वास केवल उपचार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ठीक हो चुके लोगों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकें। उन्होंने परिवारों, शिक्षकों और समुदायों से नशे की रोकथाम और पुनर्वास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
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