चंडीगढ़ , अगस्त 31 -- पंजाब सरकार ने 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के तहत नशे की आपूर्ति पर रोक लगाने के साथ-साथ युवाओं में नशे की प्रवृत्ति के शुरुआती संकेतों की पहचान कर समय रहते मदद उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ बलबीर सिंह ने अभिभावकों से बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखने और बिना किसी झिझक के उनसे संवाद करने की अपील की है। डॉ. सिंह ने सोमवार को कहा, ''हर बच्चे को देखभाल, संवेदना और बातचीत के जरिए नशे की लत से बचाया जा सकता है। परिवार, देखभाल करने वालों और समाज के रूप में हमें अपनी आंखें, कान और दिल खुले रखने चाहिए।''उन्होंने कहा कि किसी करीबी व्यक्ति के व्यवहार में चिंताजनक बदलाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार नशे की लत हमेशा स्पष्ट या नाटकीय संकेतों के साथ सामने नहीं आती। व्यवहार में अचानक बदलाव, पुराने दोस्तों से दूरी बनाना, नया और गुप्त मित्र समूह, लंबे समय तक खुद को कमरे या बाथरूम में बंद रखना तथा पहले पसंद किये जाने वाले खेल या गतिविधियों में रुचि खत्म होना शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

बच्चे में बार-बार गुस्सा आना, भावनात्मक रूप से असामान्य प्रतिक्रिया देना अथवा स्कूल और शिक्षकों की ओर से लगातार शिकायतें मिलना भी ध्यान देने योग्य है। नींद की दिनचर्या में अचानक बदलाव, रातभर जागना या असामान्य समय पर सोना भी किसी समस्या का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बिना स्पष्ट कारण बार-बार पैसे मांगना, पैसे के इस्तेमाल का हिसाब न देना अथवा घर से नकदी गायब होना भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा व्यक्तिगत साफ-सफाई और पहनावे की उपेक्षा, भूख कम होना, वजन घटना तथा खाने की आदतों में बदलाव पर भी ध्यान देना चाहिए।

शारीरिक संकेतों में आंखों का लाल या बुझा-बुझा दिखाई देना, पुतलियों के आकार में असामान्य बदलाव, अत्यधिक नींद या थकान, बेचैनी, हाथ-पैर कांपना, अस्पष्ट बोलना, शारीरिक संतुलन में कमी, बार-बार चोट लगना और गंभीर मामलों में इंजेक्शन के निशान शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने हालांकि स्पष्ट किया है कि इनमें से कोई एक संकेत अकेले नशे के सेवन का प्रमाण नहीं है। कभी-कभार देर तक जागना किशोरों में सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि बच्चा लगातार अलग-थलग रहने लगे, गोपनीय व्यवहार करे, आसपास की परिस्थितियों के प्रति उदासीन रहे और सामान्य सवाल पूछने पर भी अत्यधिक रक्षात्मक प्रतिक्रिया दे, तो इसे व्यवहार के एक पैटर्न के रूप में देखते हुए विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

संगरूर के जिला नोडल मनोचिकित्सक डॉ. ईशान प्रकाश ने कहा कि परिवारों की सबसे बड़ी गलतियों में से एक मदद लेने के लिए बहुत देर तक इंतजार करना है। उन्होंने कहा कि बच्चे के नशा करने का पक्का प्रमाण मिलने का इंतजार जरूरी नहीं है। चिंता होने पर अभिभावक बातचीत शुरू कर सकते हैं या किसी विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदनामी और 'लोग क्या कहेंगे' जैसी चिंता के कारण परिवार अक्सर मदद लेने में देरी करते हैं, जिससे बच्चे को आवश्यक सहायता मिलने में समय लग सकता है।

उन्होंने कहा, '' देखभाल करने वाला अभिभावक नशे के खिलाफ पहली सुरक्षा पंक्ति है। बच्चों के लिए ऐसा सुरक्षित माहौल बनाएं कि नशा उनके लिए बच निकलने का रास्ता न बने।''विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे के व्यवहार में बदलाव नजर आने के बाद अभिभावकों की प्रतिक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्हें डांटने या सीधे आरोप लगाने के बजाय शांत माहौल में खुले सवाल पूछने और बच्चे की बात ध्यान से सुनने की सलाह दी गयी है। यदि बच्चे के नशे में शामिल होने की जानकारी मिलती है तो गुस्से में टकराव करने के बजाय निजी और शांत बातचीत के जरिए उसके व्यवहार के पीछे के कारणों को समझने का प्रयास करना चाहिए।

विशेषज्ञों ने शर्मिंदा करने, धमकाने, गलत नाम देने या केवल सजा पर निर्भर रहने से बचने की सलाह दी है, क्योंकि इससे बच्चा और अधिक छिपने लग सकता है और मदद लेने से बच सकता है। अभिभावकों से बच्चे की बात ध्यान से सुनने, अपनी चिंता स्पष्ट रूप से व्यक्त करने और बच्चे के साथ मिलकर उचित सहायता तलाशने की अपील की गयी है।

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