चंडीगढ़ , अक्टूबर 20 -- पंजाब के वित्त मंत्री एवं आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर नशे के कारोबार के स्रोतों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने नशीले पदार्थों के रूप में दुरुपयोग की जा रही दवाओं पर सख्त कानूनी प्रावधान बनाने के लिए केंद्र को कई बार पत्र लिखे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
श्री चीमा ने संवाददाताओं से दावा किया कि पंजाब में नशे के रूप में इस्तेमाल की जा रही कुछ औषधियों का निर्माण राज्य में नहीं होता, बल्कि उनकी आपूर्ति हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के बद्दी, राजस्थान और गुजरात के अहमदाबाद से होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन राज्यों में दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति पर प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण पंजाब में इनका दुरुपयोग बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रीगैबलिन, गैबा, क्लोमाइन, ट्रामाडोल, जोपिक्लोन, फ्लू प्रैक्टसोल और कैरिसोप्रोडोल जैसी दवाओं का इस्तेमाल नशे के लिए किया जा रहा है, जबकि इन्हें चिकित्सक के पर्चे पर ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के स्वास्थ्य विभाग ने 31 अक्टूबर 2025 और 21 सितंबर 2026 को केंद्र को पत्र लिखकर इन दवाओं को स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम की अनुसूची में शामिल करने की मांग की थी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ बलबीर सिंह नेभी इस संबंध में केंद्र को पत्र लिखा था।
श्री चीमा ने कहा कि जब वह पंजाब के आबकारी एवं कराधान मंत्री थे, तब उन्होंने औद्योगिक इस्तेमाल के लिए निर्धारित मिथाइल अल्कोहल के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी केंद्र को दो पत्र लिखे थे। उनके अनुसार, केंद्र की ओर से प्रभावी समाधान देने के बजाय पुराने कानूनों का हवाला दिया गया। उन्होंने संगरूर और मजीठा में मेथनॉल के सेवन से हुई मौतों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि जांच में रसायन की आपूर्ति हरियाणा के फरीदाबाद से होने का पता चला था। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की और जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे का उल्लेख करते हुए श्री चीमा ने सीमा पार से नशे की तस्करी रोकने के लिए केंद्र की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2017 से 2022 के दौरान कांग्रेस सरकार के समय पंजाब में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकार क्षेत्र को 55 किलोमीटर तक बढ़ाया गया था, लेकिन इसके बावजूद सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने पूछा कि केंद्र ने इसे रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं।
श्री चीमा ने दावा किया कि पंजाब सरकार ने पुलिस को मजबूत करने के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता मांगी थी, लेकिन उसे मदद नहीं मिली। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से ड्रोन रोधी प्रणाली तैयार की है, ताकि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये भेजे जा रहे नशीले पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि सीमा पार तस्करी रोकने की जिम्मेदारी केवल पंजाब सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती।
आप नेता ने भाजपा पर किसानों के आंदोलन के दौरान तीन कृषि कानून लाने में तत्परता दिखाने, लेकिन युवाओं को नशे से बचाने के लिए दवाओं संबंधी कानूनों में बदलाव नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र को पंजाब के नशा संकट को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय नशीले पदार्थों की आपूर्ति के स्रोतों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
श्री चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार नशा तस्करों के खिलाफ अभियान जारी रखेगी। उन्होंने परविंदर सिंह झोटा के परिवार के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि परिवार की मांग पर उनकी हत्या का मामला सीबीआई को सौंपने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान में किसी राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक बाधा को आड़े नहीं आने दिया जाएगा।
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