होशियारपुर , सितंबर 25 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि पंजाब सरकार नशा माफिया के साथ मिलीभगत कर रही है और राज्य में नशे की समस्या पर अंकुश लगाने में विफल रही है। वह भाजपा की 'नशा मुक्त यात्रा' के छठे दिन होशियारपुर पहुंचने पर आयोजित रैली को संबोधित कर रहे थे।
श्री चुघ ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशा खुलेआम बिक रहा है और भगवंत मान सरकार के पास नशे की समस्या से निपटने के लिए न तो कोई योजना है और न ही स्पष्ट नीति। उन्होंने कहा कि भाजपा ने नशे के खिलाफ पांच सूत्री अभियान तय किया है, जिसमें तस्करी नेटवर्क और नशे की आपूर्ति श्रृंखला को खत्म करना, नशे के धन के प्रवाह पर रोक लगाना, नशे के शिकार युवाओं का पुनर्वास और सामाजिक संगठनों को अभियान से जोड़ना शामिल है।
उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान उन्होंने नशे के कारण पुत्रों को खो चुकी माताओं और भाइयों को खो चुकी बहनों से मुलाकात की। उन्होंने इसे पंजाब के परिवारों का दर्द बताया।
श्री फतेहगढ़ साहिब से शुरू हुई यात्रा शहर के विभिन्न हिस्सों से होकर भगवान वाल्मीकि चौक के पास सब्जी मंडी में आयोजित रैली में पहुंची। यात्रा के दौरान शहीद भगत सिंह चौक पर स्वच्छता अभियान चलाया गया, नशे के खिलाफ शपथली गयी और शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि दी गयी। युद्ध स्मारक पर भी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। तहसील परिसर के बाहर गुरु रविदास फोर्स पंजाब के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को परिसर के भीतर रोक रखा था।
श्री चुघ ने संगरूर के दिड़बा निवासी गुलजार सिंह की मौत का उल्लेख करते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाये और मोहनजीत शेरों के मामले का भी जिक्र किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला और पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने भी पंजाब सरकार पर नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए। पूर्व विधायक शीतल अंगुराल ने दावा किया कि नशे से हुई कुछ मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हृदयाघात दर्ज किया जा रहा है।
उन्होंने शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी पंजाब सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि होशियारपुर और कपूरथला में केंद्र द्वारा स्वीकृत मेडिकल कॉलेज परियोजनाओं को भी राज्य सरकार ने आगे नहीं बढ़ाया है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा संवैधानिक संस्थाओं और निर्वाचन आयोग को लेकर की गयी टिप्पणियों पर भी सवाल उठाये।
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