नयी दिल्ली , जुलाई 08 -- केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का देशव्यापी नशा मुक्त भारत-अभियान (एनएमबीए)अब राष्ट्रव्यापी स्तर पर विस्तारित होते हुए 7.81 करोड़ से अधिक युवा, 5.24 करोड़ महिलाओं और 17 लाख शैक्षणिक संस्थानों सहित 23 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच चुका है। इसने आरंभ में 272 प्रभावित जिलों को लक्षित किया था।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंत्रालय ने देश में मादक पदार्थों की लत से निपटने के लिए 15 अगस्त 2020 से नशा मुक्त भारत अभियान -एनएमबीए चला रखा है। इसमें सामूहिक कार्रवाई की अविलम्ब आवश्यकता को समझते हुए मंत्रालय, रोकथाम, मूल्यांकन, उपचार, पुनर्वास, उपचार उपरान्त देखभाल, जन सूचना प्रसार और सामुदायिक जागरूकता सहित विभिन्न पहल समन्वयित करता है।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा है कि नशा मुक्त भारत अभियान स्वस्थ और अनुशासित युवाओं पर केंद्रित राष्ट्र निर्माण की प्रमुख पहल है। उन्होंने कहा कि एनएमबीए ने भारत को नशामुक्त बनाने के लिए मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो, राज्य और जिला सरकार, पुलिस, गैर सरकारी संगठनों, अस्पतालों आदि नियामक एजेंसियों को समन्वित तरीके से काम करने को प्रेरित किया है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान मादक पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाला प्रमुख अभियान है। उन्होंने कहा कि समकालीन नज़रिये पर आधारित यह अभियान युवाओं को शामिल करते हुए व्यापक है, ताकि भारत को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से मुक्त बनाने के साझा लक्ष्य में सभी हितधारकों के समन्वित प्रयास हो सके।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य भारत को नशामुक्त बनाना है। इसमें युवाओं, महिलाओं और समुदाय के सदस्यों को सक्रिय रूप से शामिल किया गया है और खास तौर पर उच्च शैक्षणिक संस्थानों, युवा क्लबों और महिला समूहों पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अभियान का लक्ष्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाना और प्रत्येक नागरिक को इसके दुष्परिणाम के बारे में बताना है। श्री वर्मा ने कहा कि प्रारंभिक रोकथाम और सामुदायिक भागीदारी द्वारा, यह आंदोलन स्वस्थ और खुशहाल समाज को बढ़ावा देने और मादक पदार्थों के दुरुपयोग रोकने के सामूहिक प्रयास को प्रोत्साहित करता है।

नशा मुक्त भारत अभियान के प्रमुख हितधारक और लाभार्थी युवा, महिलाएं, बच्चे, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज और व्यापक समुदाय हैं। यह अभियान आरंभ किये जाने के बाद से, नशीले पदार्थ को सेवन रोकने और इसके प्रति आगाह करने के लिए देश भर में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गयी हैं। इसमें समाज के सभी वर्गों और हितधारकों की भागीदारी रही है। मादक द्रव्यों का सेवन रोकने के मुद्दे पर संगठनात्मक भागीदारी के रुख की जगह अब सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्यों, जिलों और अन्य हितधारकों की व्यापक भागीदारी से यह अभियान अब जन आंदोलन में बदल गया है।

जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न विभागों और हितधारकों को साथ लाकर एनएमबीए के दृष्टिकोण को सामुदायिक स्तर पर सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया गया है। सहयोगात्मक रवैये से मादक पदार्थों की रोकथाम के प्रति लोगों में दायित्वबोध बढ़ा है और स्वीकृति एवं जवाबदेही को प्रोत्साहन मिला है।

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