रांची , अक्टूबर 13 -- झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग सह महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि नशे की चुनौती केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि युवाओं, परिवारों और समाज के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
श्री सिंह ने कहा हमारी सफलता गतिविधियों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जानी चाहिए कि हम कितने लोगों को नशे से बचा सके और उनके जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव ला सके।" उन्होंने कहा कि नशा रोकथाम को पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, समुदायों और विभिन्न विभागों की साझा जिम्मेदारी बनाना होगा, ताकि इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके"।वे मंगलवार को एमडीआई बिल्डिंग प्रोजेक्ट भवन में आयोजित एक कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे । उन्होंने नशा मुक्ति को केवल जागरूकता तक सीमित न रखकर रोकथाम, व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक नेतृत्व आधारित जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
मंगलवार को एमडीआई बिल्डिंग प्रोजेक्ट भवन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार झारखंड सरकार द्वारा नशीले पदार्थों की मांग में कमी एवं रोकथाम आधारित रणनीतियों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला "भारत में रोकथाम और नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के प्रयासों पर नए सिरे से विचार" का आयोजन किया गया था ।
निदेशक, सामाजिक कल्याण किरण कुमारी पासी ने कहा कि नशे की रोकथाम में परिवार और समुदाय की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। समय पर सही जानकारी, उचित मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराकर हजारों युवाओं को नशे की चपेट में आने से बचाया जा सकता है। "नशे के खिलाफ लड़ाई की सबसे बड़ी ताकत हमारा समाज, परिवार और समुदाय हैं। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, सहिया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और युवा संगठनों को नशा रोकथाम, प्रारंभिक पहचान, परामर्श एवं सामुदायिक जागरूकता के प्रमुख साझेदार के रूप में सशक्त बनाने पर बल दिया । उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, सहिया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और युवा संगठनों को नशा रोकथाम, प्रारंभिक पहचान, परामर्श एवं सामुदायिक जागरूकता के प्रमुख साझेदार के रूप में सशक्त बनाने पर बल दिया।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों, डेवलपमेंट पार्टनर्स , एवं विशेषज्ञों ने साक्ष्य आधारित, रिजल्ट ओरिएंटेड और समुदाय केंद्रित नशा रोकथाम मॉडल पर चर्चा की। जिला, प्रखंड और ग्राम स्तर पर समन्वित कार्ययोजना विकसित करने तथा रोकथाम, परामर्श, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समेकन को एकीकृत रूप से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कार्यशाला में पंचायती राज, नगर विकास, गृह विभाग के नारकोटिक्स प्रकोष्ठ, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, आई.सी.पीएस तथा जे.एस.एल.पी.एस सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए। सभी प्रतिभागियों ने नशा मुक्ति के लिए सामाजिक समावेशन एवं विभागीय कन्वर्जेंस को आवश्यक बताते हुए नशा मुक्त हेल्पलाइन 14446 तथा उपलब्ध परामर्श, उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल दिया ।
कार्यशाला के अंत में झारखंड में नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने हेतु राज्य की प्रतिबद्धता के तहत एक कार्ययोजना तैयार की गई, जिसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को प्रेषित किया जाएगा।
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