नयी दिल्ली , जुलाई 27 -- सरकार ने कहा कि देशभर के जवाहर नवोदय विद्यालयों में छात्रों के लिए स्थायी भवनों के साथ हॉस्टल और डॉरमेटरी निर्माण का काम लगातार जारी है।
शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि छात्र संख्या में वृद्धि और उपलब्ध बुनियादी ढांचे के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखते हुए नवोदय विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से छात्रावासों का निर्माण किया जा रहा है।
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालयों के स्थायी भवनों, जिनमें हॉस्टल और डॉरमेटरी भी शामिल हैं, का निर्माण कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें उपयुक्त भूमि की पहचान, नवोदय विद्यालय समिति के पक्ष में भूमि की लीज संबंधी औपचारिकताएं पूरी करना, निर्माण एजेंसी की ओर से नक्शे और अनुमान प्रस्तुत करना, धन की उपलब्धता तथा आवश्यक मंजूरियां शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार नवोदय विद्यालयों का निर्माण मुख्य रूप से फेज-ए, फेज-बी और फेज-बी (बैलेंस) के तहत किया जाता है। फेज-ए में स्कूल भवन, रसोई एवं डाइनिंग हॉल, आंशिक डॉरमेटरी और कुछ स्टाफ क्वार्टर बनाये जाते हैं। फेज-बी में आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त डॉरमेटरी और स्टाफ क्वार्टर का निर्माण किया जाता है। वहीं फेज-बी (बैलेंस) में शेष आवश्यक डॉरमेटरी का निर्माण किया जाता है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान छात्रावास सुविधाओं का विस्तार किया गया है। वर्ष 2023-24 में कांशीरामनगर में 192 बेड, हापुड़ में 384, शामली में 192, बदायूं में 192 और सुल्तानपुर में 288 बेड की हॉस्टल/डॉरमेटरी सुविधाओं का निर्माण किया गया। वहीं 2025-26 में गौतम बुद्ध नगर में 24 बेड और सीतापुर-I में 48 बेड की हॉस्टल/डॉरमेटरी सुविधाओं का निर्माण शुरू किया गया है।
मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गयी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023-24 में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 12,480 डॉरमेटरी बेड का निर्माण शुरू या पूरा किया गया। इनमें जम्मू-कश्मीर में 2,112, छत्तीसगढ़ में 1,824, गुजरात में 1,728, अरुणाचल प्रदेश में 1,056 और उत्तर प्रदेश में 1,248 बेड शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में भी छात्रावास क्षमता बढ़ाने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान अरुणाचल प्रदेश में 1,248, जम्मू-कश्मीर में 1,176, झारखंड में 840 और छत्तीसगढ़ में 576 डॉरमेटरी बेड का निर्माण शुरू या पूरा किया गया।
सरकार के अनुसार नवोदय विद्यालयों में स्थायी बुनियादी ढांचे का विकास एक सतत प्रक्रिया है और इसका विस्तार विद्यालयों में छात्रों की संख्या तथा वास्तविक जरूरत के आधार पर किया जाता है। इसका उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
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