नयी दिल्ली , सितंबर 30 -- सरकार ने सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की बिजली की निकासी और पारेषण लाइनों में विभवांतर के उतार-चढ़ाव की समस्या को देखते हुए इसके लिए विशेष ग्रिड बनाने की 1,86,405 करोड़ रुपये की पीएम धारा योजना को मंजूरी प्रदान कर दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां बुधवार को हुई बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी। बैठक के बाद सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्वाभाविक रूप से सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की लाइनों में विभवांतर में उतार-चढ़ाव होता रहता है। इससे निपटने के लिए विशेष किस्म के ग्रिड डिजाइन करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-3 के 1,86,405 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की गयी है। इससे राजस्थान और लद्दाख जैसे प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों की परियोजनाओं से बिजली निकासी की व्यवस्था मजबूत होगी। राज्यों के बीच पारेषण तंत्र को मजबूत बनाया जायेगा ताकि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा सके।

योजना में ग्रिड में लचीलापन बनाए रखने के लिए हरित ऊर्जा जहां बन रही है उसके पास या किसी अन्य महत्वपूर्ण स्थान पर 50 गीगीवाट आवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) लगाने का प्रावधान भी है। इससे ऊर्जा की आपूर्ति में उतार-चढ़ाव, पीक-आवर में बिजली कटौती और जब धूप नहीं होती है उस समय की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।

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