नयी दिल्ली , अक्टूबर 10 -- केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने और देश की रणनीतिक संप्रभुता को मजबूत करने के लिए उद्योग जगत को नवाचार को बढ़ावा देने, वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावसायिक उद्यम में बदलने और देश की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आगे आना चाहिए।
राजधानी में आयोजित पीएचडी वाणिज्य उद्योग मंडल के 121वें सालाना सेशन को संबोधित करते हुए डॉ सिंह ने वैज्ञानिक क्षमताओं को स्वदेशी तकनीकों, वाणिज्य रूप से सफल उद्यमों और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समाधानों में बदलने के लिए सरकार, उद्योग जगत, अकादमिक क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्ट-अप्स को एक साथ लाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। बैठक में भारत की आर्थिक वृद्धि और नवाचार की प्राथमिकताओं पर चर्चा करने के लिए उद्योग और व्यापार जगत की जानी-मानी हस्तियां तथा अन्य हितधारक एकत्रित हुए थे।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की तकनीकी ग्रोथ का अगला चरण कहीं और विकसित तकनीकों को अपनाने से आगे बढ़कर वैश्विक महत्व वाले स्वदेशी समाधान बनाने की दिशा में बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतियों में सुधार के बाद नवाचार और अनुसंधान के लिए विशेष परिस्थिति की तंत्र का विस्तार और रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में प्राइवेट सेक्टर की ज़्यादा भागीदारी यह दिखाती है कि जब वैज्ञानिक क्षमताओं को अनुकूल नीतिगत परिवेश और उद्यमशीलता की पहल का समर्थन मिलता है, तो कैसे बड़े अवसर पैदा होते हैं।
नेशनल क्वांटम मिशन के तहत हुई प्रगति का ज़िक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में भारत ने 2,000 किलोमीटर का क्वांटम-सुरक्षित कम्युनिकेशन हासिल करने का आठ साल का लक्ष्य रखा था और तीन साल में ही 1,000 किलोमीटर का प्रबंध हासिल कर लिया। उन्होंने क्वांटम कम्युनिकेशन के रणनीतिक और सुरक्षा महत्व और नयी तकनीकों में घरेलू क्षमताएं विकसित करने की अहमियत पर ज़ोर दिया।
उन्होंंने भारत की जैविक प्रौद्योगिकी आधारित अर्थव्यवस्था में हुई तीव्र वृद्धि का भी ज़िक्र किया, जो 2014 में लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर लगभग 196 अरब अमेरिकी डॉलर हो गयी है और 2030 तक इसे 300 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित